इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण रेयर अर्थ मैटेरियल्स के अन्वेषण और प्रसंस्करण में राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी क्षेत्रों के आर्थिक विकास व इस मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अहम योगदान दे सकती है। भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है।
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रेयर अर्थ मैटेरियल्स क्यों है जरूरी?
रिपोर्ट में कहा गया है कि रेयर अर्थ मैटेरियल्स समेत अन्य महत्वपूर्ण खनिज, अपने अद्वितीय भौतिक और रासायनिक गुणों के कारण आधुनिक उत्पादन क्षेत्र के लिए जरूरी हैं। ये गुण ऊर्जा की खपत को कम करने, उपकरणों को छोटा बनाने में सहायक और तापीय स्थिरता प्रदान करने में मदद करते हैं। इसके परिणामस्वरूप, रेयर अर्थ मैटेरियल्स इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, निर्माण और मशीनरी जैसे उद्योगों के लिए हाल के वर्षों में खासले महत्वपूर्ण हो गए हैं।
दुर्लभ मृदा तत्वों का कुल आयात 33 मिलियन डॉलर प्रति वर्ष रहा
इसमें कहा गया है कि दुर्लभ मृदा अन्वेषण और प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने में राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी क्षेत्रीय आर्थिक विकास और महत्वपूर्ण खनिज मूल्य शृंखलाओं में आत्मनिर्भरता में योगदान दे सकती है। विश्लेषण से पता चला है कि पिछले चार वर्षों में भारत का दुर्लभ मृदा तत्वों और संबंधित यौगिकों का कुल आयात औसतन लगभग 33 मिलियन डॉलर प्रति वर्ष रहा है।
रेयर अर्थ मेटेरियल्स का आयात 31.9 मिलियन डॉलर रहा
चालू वित्त वर्ष में, रेयर अर्थ मेटेरियल्स का आयात 31.9 मिलियन डॉलर रहा। इस बीच, रेयर अर्थ मैग्नेट का आयात काफी अधिक रहा है, हाल के वर्षों में सालाना आधार पर इसका आयात औसतन 249 मिलियन डॉलर था। वित्त वर्ष 25 में, चुम्बक का आयात बढ़कर 291 मिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है।
रेयर अर्थ मैटेरियल्स और मैग्नेट का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता है। रिपोर्ट के अनुसार, इन पदार्थों का उपयोग प्रमुख रूप से छह उद्योगों में केंद्रित है, जहां मूल धातुओं, विद्युत और ऑप्टिकल उपकरणों का अधिक से अधिक उपयोग होता है।