रसोई घर से लेकर आपकी जेब तक, महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। सरकार द्वारा बुधवार को जारी ताजा आर्थिक आंकड़ों ने आम लोगों की चिंता थोड़ी बढ़ा दी है। जुलाई के महीने में देश की खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) बढ़कर 4.45% पर पहुंच गई है, जो इससे पिछले महीने यानी जून में 4.38% थी। हालांकि यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 4.50% के अनुमान से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% के तय लक्ष्य से लगातार ऊपर बना हुआ है। यह इस साल नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई शृंखला और नए कंजम्पशन बास्केट को अपनाने के बाद से महंगाई का सबसे उच्चतम स्तर है।
हालांकि, इस चौतरफा तेजी के बीच कुछ सब्जियों के दामों में गिरावट (डिफ्लेशन) भी दर्ज की गई जिससे थोड़ी राहत मिली। आलू के दाम पिछले साल की तुलना में 16.56% कम हुए। भिंडी में 5.52% की गिरावट आई, जबकि मटर (-5.27%) और टमाटर (-4.59%) भी सस्ते हुए हैं।
आरबीआई का महंगाई पर क्या सोचना है और क्या आगे राहत मिलेगी?
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को खुदरा महंगाई दर को 4% पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है, जिसमें 2% से 6% का एक सहिष्णुता बैंड तय है। आरबीआई के अधिकारी मल्होत्रा ने साफ किया है कि कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और महंगाई पर काबू पाना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है।
एक राहत की बात यह है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और सप्लाई सुधरने की वजह से आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने महंगाई के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है। इसके अलावा, मुख्य कीमती धातुओं को छोड़कर अन्य कोर महंगाई अभी भी नियंत्रण में बनी हुई है।
आने वाले महीनों में महंगाई की रफ्तार कैसी रहेगी?
आरबीआई और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले निकट भविष्य में मुख्य महंगाई दर में अभी थोड़ा और उछाल आ सकता है और इस साल की तीसरी तिमाही (Q3) में यह अपने चरम पर पहुंच सकती है।
आरबीआई के तिमाही अनुमानों के मुताबिक:
इसके बाद वित्तीय वर्ष के अंत तक कोर महंगाई और सामान्य महंगाई में स्थिरता आने की उम्मीद की जा रही है।