भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एक समिति ने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को वित्तीय क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग से पैदा होने वाली जोखिमों को कम करने के लिए नीति बनाने की सिफारिश की है। आरबीआई ने पिछले साल दिसंबर में वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार और नैतिक सक्षमता (फ्री-एआई) के लिए एक रूपरेखा विकसित करने के लिए समिति का गठन किया था।
बुधवार को आरबीआई की ओर से प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में, पैनल ने वित्तीय क्षेत्र में एआई के उपयोग को निर्देशित करने के लिए एक रूपरेखा तैयार की है। इसका उद्देश्य एआई से जुड़ी जोखिमों से बचाव करते हुए उसकी क्षमता का दोहन करना है।
समिति ने एआई को अपनाने के लिए आधारभूत सिद्धांतों के रूप में कार्य करने हेतु सात सूत्र विकसित किए हैं। समिति ने एक दूरदर्शी दृष्टिकोण की सिफारिश की है। इसमें छह रणनीतिक स्तंभों के तहत 26 अमल में लाई जा सकते वाली सिफारिशों को शामिल किया गया है।
रिपोर्ट में एक ऐसे वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र की परिकल्पना की गई है, जहां नवाचार को प्रोत्साहित करने और जोखिम को कम करने के बीच सामंजस्य हो न कि ये एक दूसरे के विपरीत हों। रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए, एआई के विकास की चुनौतियों से निपटने के नए तरीके मुहैया करता है।"
रिपोर्ट के अनुसार कई मॉडल और कई भाषाओं में सक्षम एआई उन लाखों लोगों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में सक्षम हो सकता है जो अभी तक वंचित हैं। सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर, एआई के जबरदस्त लाभ हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, "यदि इसका उपयोग बिना सुरक्षा के किया जाए तो इससे मौजूदा जोखिम बढ़ सकता है और नए तरह के नुकसान हो सकते हैं।" एआई जोखिमों को कम करने के लिए, पैनल ने विनियमित संस्थाओं (आरई) के बोर्ड से अनुमोदित एआई नीति तैयार करने और उपभोक्ताओं को एआई से निपटने के दौरान जागरूक करने की सिफारिश की है।