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RBI: संजय मल्होत्रा पहली बार करेंगे एमपीसी बैठक की अध्यक्षता, फैसला कब; क्या ब्याज दरों में होगी कटौती? जानें

Tue, 04 Feb 2025 05:41 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

RBI MPC Meeting: बजट के बाद अब सब की निगाहें 7 फरवरी 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दरों के लेकर होने वाली घोषणाओं पर है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई )के नए गवर्नर संजय मल्होत्राा की अध्यक्षता में होने वाली 5 से 7 फरवरी तक होने वाली नई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में ब्याज दरों में कटौती की संभावना है। आइए जानते हैं एमपीसी का फैसला कब आएगा और इससे जुड़ी सारी जानकारी आप कहां हासिल कर सकते हैं।
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संजय मल्होत्रा - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार 5 फरवरी से शुरू होगी। केंद्रीय बैंक के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा पहली बार बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में ब्याज दरों पर लिए गए फैसलों का एलान आरबीआई गवर्नर 07 फरवरी 2025 (शुक्रवार) को करेंगे। जानकारों के अनुसार, बाजार ब्याज दरों में संभावित कटौती का बेसब्री से इंतजार कर कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में 25 आधार अंकों की कटौती का अनुमान लगाया गया है। अगर ऐसा होता है, तो बेंचमार्क उधारी दर यानी रेपो रेट मौजूदा 6.5 प्रतिशत से घटकर 6.25 प्रतिशत हो जाएगी। नए गवर्नर संजय मल्होत्रा दिसंबर 2024 में पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पहली बार एमपीसी की बैठक में शामिल होंगे। एमपीसी की पिछली बैठक यानी दिसंबर 2024 में, नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 50 आधार अंकों की कटौती का फैसला लिया गया था

जानकारों को मौद्रिक नीति समिति से राहत की उम्मीद

बजट के बाद अब सब की निगाहें 7 फरवरी 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दरों के लेकर होने वाली घोषणाओं पर है। बैंकों,  विशेषज्ञों तथा अर्थशास्त्रियों ने  उम्मीद की है कि रिजर्व बैंक इस बार ब्याज दरों में कुछ राहत दे सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई )के नए गवर्नर संजय मल्होत्राा की अध्यक्षता में होने वाली 5 से 7 फरवरी तक होने वाली नई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में ब्याज दरों में कटौती की संभावना है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आगामी एमपीसी में रेपो दर में कटौती या आरबीआई द्वारा निर्धारित बेंचमार्क उधार दर को 6.5 प्रतिशत से 6.25 प्रतिशत तक 25 आधार अंकों (बीपीएस) तक कम किया जा सकता है। एमपीसी 7 फरवरी को रेपो दर पर अपने फैसले की घोषणा करेगी।

25 आधार अंकों की हो सकती है कटौती: एसबीआई रिसर्च

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के रिसर्च नोट के अनुसार फरवरी 2025 की नीति में 25 आधार अंकों की दर कटौती की उम्मीद की जा सकती है। इस चक्र के दौरान संचयी दर कटौती कम से कम 75 आधार अंक हो सकती है। फरवरी और अप्रैल 2025 के बाद दूसरा रेट कट अक्टूबर 2025 में शुरू हो सकता है।  नोट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक को लिक्विडिटी फ्रेमवर्क पर दोबारा से विचार करने की आवश्यकता है, मौद्रिक राजकोषीय समन्वय पर ध्यान देने की जरूरत है।  

रेपो रेट में कटौती का फैसला टल सकता है अप्रैल या जून तक: इक्रा

इक्रा ने अपने नोट में कहा है कि पिछले एमपीसी बैठक के बाद से आनेवाले डेटा से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही निराशाजनक रही है। वहीं सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अपेक्षा से कम रहने की वजह से वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में विकास के परिणाम बेहतर होने की संभावना है। खरीफ उत्पादन में अच्छा उत्पादन और रबी की बुआई के लिए अनुकूल रुझान मजबूत कृषि वर्ष की और संकेत देते हैं। इसके अलावा, औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों से संबंधित अधिकांश उच्च आवृत्ति संकेतकों ने वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही की तुलना में तीसरी तिमाही में अपनी साल-दर-साल वृद्धि दर में तेजी देखी है। यह सभी संकेत भारतीय बाजारों के लिए अच्छे हैं, वहीं अगर वैश्विक घटनाक्रम सही नहीं रहा और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और निचले स्तर पर फिसला है, ऐसे में पॉलिसी में रेट यानी ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत अप्रैल 2025 या फिर जून 2025 की बैठकों तक टल सकती है।

विशेषज्ञों को उम्मीद- खपत और मांग को बढ़ावा देने के हो सकते हैं उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय दरों में कटौती होती है तो भारत में खपत और मांग को बढ़ावा मिलेगा। बजट में 12 लाख रुपये या उससे कम आय वाले करदाताओं को आयकर से छूट दिए जाने से इस समय दरों में कटौती से खपत मांग को भावनात्मक रूप से बढ़ावा देने में मदद करेगी। वहीं दूसरी और बाजार के जानकारों का कहना है कि औद्योगिकी और सेवा क्षेत्र के आंकड़े अच्छे आए हैं, जबकि अमेरिका और चीन में टैरिफ युद्ध की वजह से रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर बना हुआ है। हो सकता है यह दरों में कटौती अप्रैल या फिर जून तक टल सकती है। वहीं दूसरी और आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में 1.5 लाख करोड़ रुपये की नकदी डालने की घोषणा की थी, और रिजर्व बैंक छह महीने की अवधि के लिए 5 बिलियन डॉलर की डॉलर-रुपया खरीद व बिक्री स्वैप की नीलामी भी करेगा।

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