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Report: 2035 तक 168 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी देश की सबसे युवा पीढ़ी; खपत बढ़ाने में जेनरेशन जेड की भूमिका

Thu, 17 Oct 2024 05:41 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) और स्नैपचैट की पैरेंट कंपनी स्नैप इंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की जेनरेशन जेड आबादी 37.7 करोड़ से अधिक है। यह देश में रहने वाली अब तक की सबसे बड़ी पीढ़ी है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Istock
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विस्तार
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देश की जेनरेशन जेड यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मी सबसे युवा पीढ़ी अपने खर्च के जरिये खपत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 2035 तक यह आबादी 2 लाख करोड़ डॉलर (करीब 168 लाख करोड़ रुपये) खर्च करेगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण खपत में और तेजी आएगी।
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बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) और स्नैपचैट की पैरेंट कंपनी स्नैप इंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की जेनरेशन जेड आबादी 37.7 करोड़ से अधिक है। यह देश में रहने वाली अब तक की सबसे बड़ी पीढ़ी है। इनका सामूहिक खर्च 860 अरब डॉलर है, जो भारत की कुल खपत का करीब 43 फीसदी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 860 अरब डॉलर में से करीब 200 अरब डॉलर यह आबादी खुद खर्च करती है। बाकी 660 अरब डॉलर का खर्च इनकी सिफारिशों या प्राथमिकताओं से प्रभावित होकर दूसरे लोग खरीदारी पर करते हैं। जेनरेशन जेड आबादी के खर्च के रुझान से पता चलता है कि 2035 तक यह 2 लाख करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंच जाएगा।
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हर दूसरे युवा के पास होगी नौकरी
स्नैप इंक के भारत में प्रबंध निदेशक पुलकित त्रिवेदी ने कहा, 37.7 करोड़ से अधिक जेनरेशन जेड आबादी के साथ भारत एक युवा राष्ट्र है। यह आबादी खपत के जरिये अगले दो दशकों में भारत के विकास के भविष्य को आकार देगी। अनुमान है कि 2025 तक जेनरेशन जेड आबादी प्रत्यक्ष तौर पर 250 अरब डॉलर खर्च करेगी और 2035 तक यह आंकड़ा 1.8 लाख करोड़ डॉलर पहुंच जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि हर चार जेनरेशन जेड में एक सदस्य के पास पहले से नौकरी है। 2025 तक हर दूसरे जेन जेड के पास कमाई का जरिया होगा।

युवा पीढ़ी का लाभ उठाने में काफी पीछे हैं व्यवसाय
रिपोर्ट में कहा गया है कि अवसरों के बावजूद अधिकांश व्यवसायों ने जेनरेशन जेड का लाभ नहीं उठाया है। सिर्फ 15 फीसदी ही इनका लाभ उठाने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं। बीसीजी इंडिया की सीनियर पार्टनर एवं प्रबंध निदेशक निमिषा जैन का कहना है कि जेनरेशन जेड आबादी का प्रभाव चुनिंदा श्रेणियों तक ही सीमित नहीं है। यह पीढ़ी फैशन, खाने-पीने से लेकर ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स तक पर होने वाले खर्च को प्रभावित कर रही है। 80 फीसदी जेनरेशन जेड आबादी खुद को अभिव्यक्त करने और अपने सर्कल से जुड़ने के लिए तस्वीरों, जीआईएफ एवं इमर्सिव विजुअल्स की मदद लेती है।
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