टाटा समूह के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद दिए अपने बयान में सायरस मिस्त्री ने कहा कि टाटा बोर्ड के इस फैसले से मैं स्तब्ध (शॉक्ड) हूं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टाटा बोर्ड को एक मेल में उन्होंने लिखा है कि बोर्ड के फैसले से मैं स्तब्ध हूं। मुझे अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया।
बोर्ड ने अपनी साख के मुताबिक काम नहीं किया। उन्होंने लिखा कि टाटा संस और समूह कंपनियों के शेयरधारकों के प्रति जिम्मेदारी निभाने में निदेशकगण विफल रहे और कारपोरेट गवर्नेंस का कोई ख्याल नहीं रखा गया। कारपोरेट रणनीति नहीं होने के आरोप के जवाब में मिस्त्री ने कहा कि टाटा संस बोर्ड को उन्होंने 2025 तक की रणनीति सौंप दी थी। मिस्त्री ने कहा कि शुरुआत में रतन टाटा और लॉर्ड भट्टाचार्या का समूह को लीड करने का ऑफर ठुकरा दिया था, लेकिन उम्मीदवार नहीं होने चलते उन्हें आगे लाया गया।
साथ ही यह भरोसा दिया गया था कि उन्हें काम करने की पूरी आजादी होगी। इसमें रतन टाटा की भूमिका सलाहकार और गाइड की होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नियुक्ति के बाद टाटा ट्रस्ट ने एसोसिएशंस की नियमावली में संशोधन किया। इसमें ट्रस्ट, टाटा संस बोर्ड और चेयरमैन के बीच इंगेजमेंट के टर्म को बदला गया। नियमों में बदलाव के जरिए टाटा संस के चेयरमैन की भूमिका को कम किया गया और एक वैकल्पिक पावर स्ट्रक्चर तैयार किया गया।