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अदाणी ग्रुप के लिए बड़ी राहत?: अमेरिका में धोखाधड़ी का मामला हो सकता है खत्म; कांग्रेस ने पीएम मोदी को घेरा

Thu, 14 May 2026 09:13 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जानिए गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के मामले के संभावित अंत और अदाणी ग्रुप पर इसके असर के बारे में। पूरी खबर पढ़ें।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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भारत के दिग्गज कारोबारी गौतम अदाणी के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है, जो एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति पर एक साल से अधिक समय से लटकी कानूनी तलवार को हटा सकती है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारी गौतम अदाणी के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और आपराधिक मामले को खत्म करने की तैयारी में हैं। इस कदम से अदाणी ग्रुप के लिए अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार में वापसी करने और अपनी आक्रामक विस्तार रणनीति को फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा।

क्या है संभावित समाधान?

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग इसी सप्ताह आरोपों को वापस लेने की घोषणा कर सकता है। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ी प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:

  • प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) भी नवंबर 2024 में अदाणी और अन्य के खिलाफ लाए गए समानांतर सिविल धोखाधड़ी मामले को निपटाने की ओर बढ़ रहा है।
  • चूंकि प्रतिवादी अमेरिका से बाहर हैं, इसलिए न्याय विभाग आरोपों को प्रभावी ढंग से हटा सकता है, लेकिन एसईसी के समाधान में संभावित रूप से कंपनी पर एक आर्थिक जुर्मानालगाया जा सकता है।
  • न्याय विभाग का मुकदमा अदाणी परिवार के अमेरिका में न होने के कारण रुका हुआ था, जबकि एसईसी का मामला अदालत में आगे बढ़ रहा था।

250 मिलियन डॉलर की रिश्वत के आरोप और विवाद

नवंबर 2024 में, ब्रुकलिन में अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने पांच-सूत्रीय आरोप पत्र में दावा किया था कि अदाणी और अन्य प्रतिवादियों ने भारत में सौर-ऊर्जा अनुबंध हासिल करने के लिए 250 मिलियन डॉलर की रिश्वत योजना चलाई। न्याय विभाग का आरोप था कि उन्होंने भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने का वादा किया और अमेरिकी निवेशकों से धन जुटाते समय इस योजना को छिपाया। 

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इसके अलावा, एसईसी ने भी अपने समानांतर मुकदमे में आरोप लगाया था कि गौतम अदाणी ने 'अदाणी ग्रीन' द्वारा भारत के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र परियोजना के अनुबंध प्राप्त करने के लिए अधिकारियों को करोड़ों डॉलर की रिश्वत देने या उसका वादा करने का नेतृत्व किया। हालांकि, अदाणी ग्रुप ने लगातार इन आरोपों का खंडन किया है। मामले में गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर सहित कोई भी प्रतिवादी अब तक अदालत में पेश नहीं हुआ है, जिससे मामला प्रभावी रूप से रुका हुआ था। 

कानूनी बचाव और आगे का रास्ता

इस साल की शुरुआत में, अदाणी के वकीलों ने एसईसी के धोखाधड़ी के मामले को खारिज करने की अपील करते हुए दस्तावेज दाखिल किए थे। उनका तर्क था कि नियामकों के पास इन दोनों व्यक्तियों पर आवश्यक अधिकार क्षेत्र नहीं है और मामले को आधार देने वाले कथित गलत बयान कार्रवाई योग्य नहीं थे। 

अगर इन मामलों का अंत होता है, तो यह कोयला खनन से लेकर नवीकरणीय ऊर्जा और हवाई अड्डों तक का कारोबार करने वाली भारत की सबसे ताकतवर कंपनियों में से एक, अदाणी ग्रुप के लिए एक महत्वपूर्ण वरदान साबित होगा। फिलहाल, ब्रुकलिन में अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है और एसईसी या अदाणी ग्रुप के प्रतिनिधियों ने भी तुरंत कोई जवाब नहीं दिया है।

स्पष्ट है पीएम मोदी एकतरफा ट्रेड डील पर क्यों सहमत हुए : कांग्रेस

अरबपति कारोबारी गौतम अदाणी को अमेरिकी न्याय विभाग से राहत मिलने की खबरों के बीच कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, अब साफ हो चुका है कि पीएम मोदी एकतरफा अमेरिकी व्यापार समझौते पर क्यों सहमत हुए। उन्होंने कहा कि ये भी स्पष्ट हो चुका है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी दहशतगर्दों के खिलाफ शुरू की गई भारतीय सेना की कार्रवाई- ऑपरेशन सिंदूर अचानक क्यों रोक दिया गया।

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