नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के लिए एक बड़ी रणनीतिक सफलता मिल गई है। अमेरिका ने मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी को वेनेजुएला से सीधे कच्चा तेल खरीदने के लिए जनरल लाइसेंस जारी कर दिया है। यह कदम रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, क्योंकि इससे कंपनी को सस्ते कच्चे तेल तक सीधी पहुंच मिल सकेगी और उसके ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार हो सकेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस से तेल खरीद रोकने और अमेरिका व संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हुए हैं। इस समझौते के बदले में, अमेरिका ने रूसी तेल आयात के कारण भारतीय सामानों पर लगाए गए 25% दंडात्मक शुल्क को हटा दिया है।
सरकारी तेल कंपनियां भी रेस में
रिलायंस के अलावा, सरकारी तेल कंपनियां भी इस मौके का फायदा उठा रही हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने संयुक्त रूप से 20 लाख बैरल वेनेजुएला क्रूड खरीदा है। इसमें से 15 लाख बैरल आईओसी की पारादीप रिफाइनरी और पांच लाख बैरल एचपीसीएल की विशाखापत्तनम यूनिट के लिए है। प्रतिबंधों से पहले रिलायंस और आईओसी दोनों ही वेनेजुएला के नियमित खरीदार थे।
रिलायंस को मिला यह लाइसेंस भारतीय रिफाइनिंग क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। सस्ते वेनेजुएला क्रूड की वापसी से न केवल रिलायंस की इनपुट लागत कम होगी, बल्कि यह भारतीय कंपनियों को रूसी तेल पर निर्भरता कम करने और अमेरिकी व्यापार संबंधों को संतुलित करने में भी मदद करेगा। अब बाजार की नजर इस पर होगी कि आने वाली तिमाहियों में यह क्रूड रिलायंस के वित्तीय नतीजों को कैसे प्रभावित करता है।