एक मई से रियल्टी एक्ट लागू हो रहा है लेकिन अभी तक इसके नियमों को मानने के लिए कई राज्य तैयार नहीं हैं। यह राज्य इसके ढांचे में कुछ बदलाव चाहते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक देश के 32 राज्य और केंद्र शासित राज्यों में से केवल 12 राज्य रियल्टी एक्ट के नियमों ज्यों का त्यों मानने को तैयार हैं। इसमें तीन केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीप और चंडीगढ़ के अधिकारियों ने भी रियल्टी एक्ट के नियमों को स्वीकार किया है।
एक्ट के तहत तैयार किए गए नियमों को लागू करने के लिए राज्य सरकारों को नियामक प्राधिकरण नियुक्त करना होगा। लेकिन अभी तक केवल मध्य प्रदेश ने एक स्थायी नियामक प्राधिकरण नियुक्त किया है। साथ ही तीन केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीप और चंडीगढ़ ने अंतरिम अधिकारियों की नियुक्ति की है।
हालांकि स्वयं बीजेपी शासित हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों ने ऐसा नहीं किया है। इसलिए इन राज्यों में कोई नई परियोजना शुरू नहीं की जा सकती है। बहरहाल इससे रियल एस्टेट क्षेत्र को नुकसान होगा क्योंकि पहले से ही वह मंदी से जूझ रहा है।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वैकेया नायडू ने कहा कि इस एक्ट के तहत कुछ पूर्वोत्तर राज्यों सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड के पूर्वोत्तर राज्यों को सामूहिक रूप से जमीन और अन्य स्थानीय कानूनों के लिए अपनी जरूरतों के अनुसार नियमों में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने कहा कि विभाग इन राज्यों के साथ बातचीत कर रहा है, इसके बाद योजना के नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।