आरबीआई की हर दो महीने में होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक सोमवार यानी 7 अक्टूबर से शुरू हो गई। एमपीसी के चेयरमैन और आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास बुधवार यानी 9 अक्तूबर को तीन दिवसीय बैठक में लिए गए फैसलों का एलान करेंगे। आम आदमी, शेयर बाजार और निवेशकों को उम्मीद है कि आरबीआई ब्याज दर घटाकर लोगों को सस्ता लोन उपलब्ध कराने का रास्ता खोलेगा, लेकिन जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल ऐसे किसी फैसले से परहेज करेगा।
खुदरा महंगाई अब भी केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का सबब
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार खुदरा महंगाई अब भी केंद्रीय बैंक के लिए चिंता का सबब है। दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने का असर कच्चे तेल और जिंस की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में ब्याज दरों में कटौती का कोई फैसला लिया जाएगा इसकी उम्मीद कम है। रियल एस्टेट उद्योग का कहना है कि रियल एस्टेट के जानकारों का कहना है कि देश में दशहरा, धनतेर ऐसे शुभ दिन अथवा अवसर होते हैं जब लोग अपने नए घरों की बुकिंग के साथ घरों की खरीदारी करते हैं। यदि आरबीआई ब्याज दरों को बढ़ाती है, तो होम लोन की किश्तें बढ़ जाएगी और लोग खरीदारी से पीछे हट सकते हैं। यदि ब्याज दरों में कटौती होती है तो सभी सेक्टर को लाभ होगा। लेकिन जो स्थितियां वैश्विक स्तर पर चल रही है उसको देखते हुए ब्याज दरों में किसी भी प्रकार के बदलाव होने की कम संभावना है।
रियल एस्टेट कारोबार को फरवरी 2023 से स्थिर ब्याज दरों का मिला फायदा
अर्केड डेवलर्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अमित जैन बताते हैं कि रियल एस्टेट उद्योग को फरवरी 2023 से स्थिर ब्याज दरों का फायदा मिला है, जिसमें होम लोन सहित अनेक लोन दरों को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली है। हम आरबीआई से अक्टूबर में 25 बीपीएस से 30 बीपीएस तक दर में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही के त्योहारी सीजन में होम लोन की मांग बढ़ेगी और घरों की बिक्री में इजाफा होगा। त्योहारी सीजन घरों की बिक्री के लिए महत्वपूर्ण समय है। उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में कटौती से देश के सभी बाजारों में मांग बढ़ेगी, लेकिन विशेष रूप से मुंबई में जहां हाल ही में रिकॉर्ड 9 महीने के समय में एक लाख घरों की बिक्री हुई है। मैजिकब्रिक्स के वित्त प्रमुख हितेश उप्पल कहते हैं कि पिछले कुछ समय से घरों की खरीदारी में उछाल आया है, यह तेजी आगे जारी रहे, इसके लिए ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखने की जरूरत है। पिछले साल की तुलना में संपत्ति की कीमतों में भी 20 प्रतिशत तक उछाल आया है। डेवलपर्स त्योहारी ऑफर, आसान भुगतान योजनाओं और विशेष प्रोत्साहनों के साथ प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जो लक्जरी और किफायती आवास क्षेत्रों में खरीदारों के लिए निवेश का मौका भी देते हैं।
जानकारों का अनुमान- ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम
आरबीआई ने फरवरी 2023 में रेपो दर को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखा है और इस बार बैठक में भी रेपो रेट में कटौती की संभावना कम है, लेकिन दिसंबर तक कुछ गुंजाइश आरबीआई के पास होगी। जानकारों का कहना है कि रिटेल महंगाई अब भी चिंता का विषय बनी हुई है साथ ही पश्चिम एशिया संकट और बढ़ने की संभावना, जिसका असर कच्चे तेल और जिंस की कीमतों पर होगा। सरकार ने केंद्रीय बैंक को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आधारित खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत (2 प्रतिशत ऊपर या नीचे) बनी रहे, उसका काम सौंपा है। बाजार के जानकारों का कहना है आरबीआई अमेरिकी की फेडरल रिजर्व का अनुसरण नहीं करेगा। बता दें कि अमेरिका की केंद्रीय बैंक ने अपनी हालिया बैठक के बाद बेंचमार्क दरों में 0.5 प्रतिशत कटौती की है।