देश की दो सबसे भरोसेमंद वित्तीय संस्थाओं के अर्थशास्त्री बीते दिनों सोशल मीडिया पर आमने-सामने नजर आए। मामला किसी नीतिगत फैसले का नहीं, बल्कि एक रिसर्च रिपोर्ट की मौलिकता और सही क्रेडिट देने का है। आइए जानते हैं यह बहस, क्यों दिलचस्प और संवेदनशील दोनों है।
क्या है पूरा मामला?
दिवाली की छुट्टियों के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सहायक महाप्रबंधक स्तर के अर्थशास्त्री सार्थक गुलाटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर आरोप लगाया कि भारतीय स्टेट बैंक (आरबीआई) की इकोरैप रिपोर्ट में आरबीआई की मौद्रिक नीति रिपोर्ट (एमपीआर) के हिस्सों-पैराग्राफ, चार्ट और ग्राफिक्स को बिना कोई स्पष्ट क्रेडिट दिए इस्तेमाल कर लिया गया। उन्होंने इसके स्क्रीनशॉट भी अपने पोस्ट के साथ साझा किए। एक तरह से देश के बैंकिंग नियामक के एक बड़े अधिकारी ने देश के ही सबसे बड़े बैंक पर प्लेगरिज्म यानी बिना क्रेडिट के किसी और के कंटेंट इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इसी कारण से यह विषय काफी संवेदनशील व दिलचस्प दोनों बन गया।