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RBI बनाम SBI: देश की दो शीर्ष वित्तीय संस्थाओं के अधिकारी सोशल मीडिया पर क्यों उलझे? जानिए पूरा मामला

Sat, 25 Oct 2025 05:11 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

RBI बनाम SBI; दिवाली की छुट्टियों के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सहायक महाप्रबंधक स्तर के अर्थशास्त्री सार्थक गुलाटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर आरोप लगाया कि भारतीय स्टेट बैंक (आरबीआई) की इकोरैप रिपोर्ट में आरबीआई की मौद्रिक नीति रिपोर्ट (एमपीआर) के हिस्सों-पैराग्राफ, चार्ट और ग्राफिक्स को बिना कोई स्पष्ट क्रेडिट दिए इस्तेमाल कर लिया गया। इस आरोप पर एसबीआई की इकोरैप रिपोर्ट बनाने की टीम के एक सदस्य ने जवाब भी दिया है। आइए इस पूरे प्रकरण के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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आरबीआई बनाम एसबीआई - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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देश की दो सबसे भरोसेमंद वित्तीय संस्थाओं के अर्थशास्त्री बीते दिनों सोशल मीडिया पर आमने-सामने नजर आए। मामला किसी नीतिगत फैसले का नहीं, बल्कि एक रिसर्च रिपोर्ट की मौलिकता और सही क्रेडिट देने का है। आइए जानते हैं यह बहस, क्यों दिलचस्प और संवेदनशील दोनों है।

क्या है पूरा मामला?

दिवाली की छुट्टियों के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सहायक महाप्रबंधक स्तर के अर्थशास्त्री सार्थक गुलाटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर आरोप लगाया कि भारतीय स्टेट बैंक (आरबीआई) की इकोरैप रिपोर्ट में आरबीआई की मौद्रिक नीति रिपोर्ट (एमपीआर) के हिस्सों-पैराग्राफ, चार्ट और ग्राफिक्स को बिना कोई स्पष्ट क्रेडिट दिए इस्तेमाल कर लिया गया। उन्होंने इसके स्क्रीनशॉट भी अपने पोस्ट के साथ साझा किए। एक तरह से देश के बैंकिंग नियामक के एक बड़े अधिकारी ने देश के ही सबसे बड़े बैंक पर  प्लेगरिज्म यानी बिना क्रेडिट के किसी और के कंटेंट इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। इसी कारण से यह विषय काफी संवेदनशील व दिलचस्प दोनों बन गया।

आरबीआई अधिकारी की पोस्ट
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पोस्ट के साथ शेयर किए गए स्क्रीनशॉट

एसबीआई की इकोरैप रिपोर्ट
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आरबीआई का कंटेंट

एसबीआई ने अपनी ओर से क्या सफाई दी?

भारतीय स्टेट बैंक के एक अधिकारी ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी बात रखते हुए इन आरोपों को दुखद और सनसनीखेज बताया। इकोरैप टीम के सदस्य तापस परिदा ने कहा कि उनका मॉडल और तरीका अलग है। एसबीआई की रिपोर्ट में हाल के  एक साल के डेटा से महंगाई के रुझान समझाए गए हैं, जबकि आरबीआई का अध्ययन लंबी अवधि का है। परिदा ने यह भी कहा कि इकोरैप की तालिकाओं में आरबीआई, एनएसओ और एसबीआई रिसर्च जैसे स्रोत दिए गए हैं। इकोरैप टीम के मुखिया सौम्या कांति घोष देश के प्रमुख आर्थिक पैनलों से भी जुड़े रहे हैं।

इस मामले पर अर्थशास्त्री अजीत रानाडे ने भी अपनी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, "अकादमिक दुनिया में उचित उद्धरण और संदर्भ के बुनियादी नियम हैं; उल्लंघन गंभीर माना जाता है।" इसके जवाब में परिदा ने तर्क दिया कि आइडिया साझा होने से ही वैश्विक शोध समृद्ध होता है। किसने 'किससे पहले' कहा, यह बहस का विषय नहीं होना चाहिए। उनका इशारा यह भी था कि प्राइस कनवर्जेंस जैसे विषयों पर पहले भी कई अध्ययन हो चुके हैं और आगे भी होंगे।

यह मामला क्यों अहम है?

देश के शीर्षस्थ संस्थानों के बीच यह तनातनी सिर्फ तकनीकी मतभेद नहीं, बल्कि वरिष्ठ स्तर पर सामंजस्य का अभाव भी जाहिर करता है। हालांकि, आरबीआई और एसबीआई की ओर से इस बारे में आधिकारिक तौर पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की गई है। दूसरी ओर, गुलाटी ने अपनी पोस्ट में साफ लिखा कि ये उनके निजी विचार हैं।

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