भारतीय परिवारों को महंगाई कम होने का भरोसा है। मुद्रास्फीति को लेकर उनकी धारणा में सुधार देखा गया है। मई 2025 के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की हाउसहोल्ड इंफ्लेशन एक्सपेक्टेशंस सर्वे के अनुसार महंगाई की औसत धारणा में गिरावट आई है।
महंगाई की धारणा में हुआ मामूली सुधार
इसमें मार्च 2025 की तुलना में मामूली सुधार हुआ है। यह मार्च की 7.8% से घटकर मई में 7.7 प्रतिशत हो गई। सर्वे में बताया गया कि अगले तीन महीनों तक महंगाई के 8.9% पर स्थिर रहने की संभावना है। जबकि एक साल बाद की अपेक्षाएं 20 आधार अंकों की गिरावट के साथ 9.5 प्रतिशत पर आ गई हैं। सर्वे से पता चला कि परिवारों को लगता है कि अल्पवाधि और मध्यम अवधि दोनों में ही कीमतों पर दबाव कम हो रहा है। पिछले सर्वे की तुलना में अब कम लोग कीमतों और महंगाई में वृद्धि की उम्मीद करते हैं।
खाद्य और आवास में सबसे ज्यादा महंगाई की संभावना
आरबीआई ने 2 मई से 11 मई के बीच भारत के 19 प्रमुख शहरों में 6,090 लोगों का सर्वे किया। इसमें महंगाई पर जनता का दृष्टिकोण जाना जाता है। सर्वे में पता चला कि लोगों ने अगले तीन महीनों में खाद्य उत्पादों में अधिक मूल्य वृद्धि की संभावनाएं जताई, यह 82.8 प्रतिशत थी। इसके बाद आवास में 78.3 प्रतिशत और गैर-खाद्य वस्तुओं में 75.3 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है।
जनसांख्यिकीय और क्षेत्रीय अंतर
एक साल बाद की बात करें तो 89.2 प्रतिशत लोगों को कीमतों में सामान्य वृद्धि की उम्मीद है। सर्वेक्षण में जनसांख्यिकीय और क्षेत्रीय अंतरों पर भी प्रकाश डाला गया। सेवानिवृत्त लोग और 60 साल से अधिक आयु के लोग युवाओं की तुलना में अधिक महंगाई को महसूस करते हैं। शहर की बात करें, तो जम्मू, कोलकाता और मुंबई के लोगों ने अधिक महंगाई की धारणा बताई, जबकि बेंगलुरु और अहमदाबाद के लोगों ने महंगाई को कम माना। यह सर्वे व्यक्तिगत राय पर आधारित है। जरूरी नहीं कि यह आरबीआई के महंगाई को लेकर आधिकारिक आंकड़ों से मेल खाए।