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भारतीय परिवारों का खर्च बढ़ा: रोजमर्रा के व्यय के लिए ऋण ले रहे छोटे कर्जदार, आरबीआई की इस रिपोर्ट ने चौंकाया

Wed, 01 Jan 2025 05:13 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अजीत सिंह, अमर उजाला

सार

आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा, पिछले तीन वर्षों में भारतीय परिवारों के कर्ज में वृद्धि दर्ज की गई है। इसकी प्रमुख वजह कर्ज लेने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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 आरबीआई ने खुलासा किया है कि छोटे कर्जदार जहां रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए कर्ज ले रहे हैं, वहीं बड़े उधारकर्ता ऋण लेकर संपत्तियां बना रहे हैं। खासकर मकान के लिए बड़े कर्जदाता उधारी ले रहे हैं। ऐसे लोगों का क्रेडिट स्कोर 720 से ऊपर होता है, जबकि छोटे कर्जदारों का स्कोर 720 से नीचे होता है।

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आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा, पिछले तीन वर्षों में भारतीय परिवारों के कर्ज में वृद्धि दर्ज की गई है। इसकी प्रमुख वजह कर्ज लेने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी है। जून, 2024 में मौजूदा बाजार मूल्यों पर जीडीपी का 42.9 फीसदी कर्ज भारतीय परिवारों पर था। यह अन्य उभरते देशों की तुलना में काफी कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य रूप से जो व्यक्तिगत कर्ज भारत में लिए जा रहे हैं, वे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, कंज्यूमर ड्यूरेबल, वाहन, दोपहिया, शिक्षा, कृषि और मॉर्गेज लोन हैं। उच्च श्रेणी के उधारकर्ताओं के बीच प्रति व्यक्ति कर्ज में वृद्धि और परिसंपत्ति निर्माण के लिए ऋण का उपयोग वित्तीय स्थिरता बढ़ाने वाला है।
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एक कर्ज नहीं चुकाया तो सारे लोन हो जाएंगे एनपीए
अगर आपने पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं चुकाया, तो आपके होम लोन या कार लोन पर भी मुसीबत आ सकती है। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आप छोटे कर्ज पर डिफॉल्ट करते हैं, तो बैंक आपके सभी कर्ज को एनपीए मान सकते हैं।

  • सबसे ज्यादा डिफॉल्ट पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे बिना गारंटी वाले कर्ज में होते हैं। ऐसे लोग, जिन्होंने इन छोटे कर्जों के साथ घर या गाड़ी के लिए बड़े कर्ज भी लिए हैं, उनके लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।

चीन में सार्वजनिक कर्ज सबसे ज्यादा 140 फीसदी
वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक ऋण 2024 के अंत तक जीडीपी का 93 फीसदी पहुंच जाएगा। इसका मतलब यह 100 लाख करोड़ डॉलर को पार कर जाएगा। 30 जून तक चीन का कर्ज उसकी जीडीपी के अनुपात में 140 फीसदी था, जबकि जापान का 120 फीसदी था। उभरते बाजारों और यूरो जोन का कर्ज जीडीपी का 100-100 फीसदी, विकसित देशों का 90 फीसदी, अमेरिका का 85 फीसदी, ब्रिटेन का 70 फीसदी और भारत का 43 फीसदी रहा है।

एक से अधिक कर्ज ले रहे हैं उधारकर्ता
क्रेडिट कार्ड व पर्सनल लोन लेने वाले करीब आधे उधारकर्ताओं के पास एक और रिटेल लोन पहले से ही है। इस तरह के कर्ज अक्सर ज्यादा रकम वाले होते हैं, जो हाउसिंग या वाहन या दोनों होते हैं।

  • इन बड़े और सुरक्षित ऋणों की तुलना में छोटे पर्सनल लोन में एनपीए का ज्यादा खतरा होता है। सबसे ज्यादा डिफॉल्ट अधिकतर असुरक्षित लोन में होता है।
  • चूक का जोखिम उन उधारकर्ताओं में ज्यादा है, जिन्होंने पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड बकाया के अलावा अन्य खुदरा ऋण लिया है।

जोखिम से निपटने के लिए उठाए गए कदम
आरबीआई ने किसी भी तरह के जोखिम से निपटने के लिए हाल में असुरक्षित ऋण जैसे कुछ खुदरा कर्जों पर बैंकों और एनबीएफसी के लिए उच्च जोखिम भार लगाया है। कर्ज का लगभग दो तिहाई हिस्सा बेहतर क्रेडिट क्वालिटी वाला है। 50,000 रुपये से कम पर्सनल लोन लेने वाले 11 फीसदी उधारकर्ताओं में से 60 फीसदी से अधिक ने 2024-25 में तीन से अधिक बार कर्ज लिया है।

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