भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अक्तूबर के नीतिगत उपाय भारत की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए बड़ी राहत है। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई का फैसला एनबीएफसी और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग सेक्टर के प्रति आरबीआई के सहायक रुख को दर्शाते हैं।
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई ने ऑपरेशनल और उच्च गुणवत्ता वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एनबीएफसी ऋण पर जोखिम भार कम करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग की लागत घटाने और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और REC जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर-फोकस्ड NBFCs को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
इसके साथ ही, आरबीआई की ये पहल मुख्य सेक्टर्स जैसे हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को क्रेडिट फ्लो सुनिश्चित करते हुए संतुलित नियामक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। ये कदम NBFC क्षेत्र में निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने और बैंक-प्रमोटेड संस्था-यों के लिए रणनीतिक लचीलापन बढ़ाने में मदद करेंगे।
वहीं, 1 अक्तूबर को मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा। इसके साथ, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) और बैंक रेट 5.75 प्रतिशत पर स्थिर हैं।