डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का इंटरनेट डोमेन नाम बदल जाएगा। इस बदलाव से बैंकों और एनबीएफसी की वेबसाइट का नाम भी बदल जाएगा। बैंकों को जहां बैंक डॉट इन का उपयोग करना होगा, वहीं एनबीएफसी को फिन डॉट इन का इस्तेमाल करना होगा। बैंकों के लिए एक अप्रैल से विशेष इंटरनेट डोमेन शुरू होगा। आने वाले समय में एनबीएफसी के लिए भी ‘फिन डॉट इन’ शुरू किया जाएगा।
बजट में मध्य वर्ग को आयकर में राहत देने से देश में खपत बढ़ेगी। हालांकि, खपत में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने का खतरा नहीं है, बल्कि इससे आर्थिक वृद्धि को जरूर समर्थन मिलेगा। यह बजट महंगाई और वृद्धि दोनों के नजरिये से शानदार है। -संजय मल्होत्रा, गवर्नर, आरबीआई
सीमा पार भुगतान और सुरक्षित होगा, ग्राहकों का बढ़ा भरोसा
आरबीआई ने सीमा पार 'कार्ड नॉट प्रेजेंट' लेनदेन में प्रमाणीकरण के अतिरिक्त कारक (एएफए) को सक्षम कर सुरक्षा का दायरा और बढ़ा दिया है। डिजिटल भुगतान के लिए एएफए की शुरुआत से लेनदेन की सुरक्षा बढ़ी है, जिससे ग्राहकों का डिजिटल भुगतान में भरोसा बढ़ा है। हालांकि, यह सिर्फ घरेलू लेनदेन के लिए अनिवार्य है।
भारत में जारी कार्डों का उपयोग कर ऑनलाइन सीमा पार लेनदेन के लिहाज से समान स्तर की सुरक्षा प्रदान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्ड नॉट प्रेजेंट (ऑनलाइन) लेनदेन के लिए भी एएफए को सक्षम करने का प्रस्ताव है। शेयरधारकों से प्रतिक्रिया के लिए मसौदा जल्द जारी होगा।
जाड़े में सब्जियों के दाम घटने और रबी फसलों की बेहतर पैदावार से खाद्य कीमतों में आएगी गिरावट
खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में नरमी की उम्मीद के बीच खुदरा महंगाई अगले वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 4.2 फीसदी रह सकती है। चालू वित्त वर्ष में इसके 4.8 फीसदी रहने का अनुमान है। आरबीआई गवर्नर ने कहा, आपूर्ति के मार्चे पर किसी झटके की आशंका नहीं है। खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर रहने, जाड़े में सब्जियों के दाम घटने और रबी फसलों को लेकर अनुकूल संभावनाओं को देखते हुए खाद्य महंगाई में उल्लेखनीय कमी आनी चाहिए। हालांकि, मुख्य (कोर) महंगाई बढ़ने का अनुमान है, लेकिन यह मध्यम स्तर पर रहेगी। चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक कुल महंगाई में सब्जियों और दालों का योगदान 32.3 फीसदी था।
गवर्नर ने कहा, खाद्य पदार्थों को लेकर अनुकूल स्थिति और पिछली मौद्रिक नीति समीक्षाओं में उठाए गए कदमों का असर जारी है। खुदरा महंगाई धीरे-धीरे चार फीसदी के लक्ष्य के आसपास आ जाएगी।
अब भी बना हुआ है जोखिम
आरबीआई गवर्नर ने कहा, ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता और प्रतिकूल मौसम की घटनाओं के साथ वैश्विक वित्तीय बाजारों में जारी अनिश्चितता को देखते हुए महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए खुदरा महंगाई चालू वित्त वर्ष में 4.8 फीसदी और 2024-25 की चौथी तिमाही में 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है।
रुपया: विनिमय दर वर्षों से स्थिर, कोई लक्ष्य तय नहीं
रुपये में लगातार गिरावट के बीच आरबीआई गवर्नर ने कहा, विनिमय दर नीति पिछले कई वर्षों से एक समान रही है। केंद्रीय बैंक ने रुपये के लिए किसी ‘विशिष्ट स्तर या दायरे’ का लक्ष्य नहीं बनाया है। भारतीय रुपये की विनिमय दर बाजार तत्व निर्धारित करते हैं। हमारा मकसद बाजार की कार्यकुशलता से समझौता किए बिना व्यवस्था और स्थिरता बनाए रखना है।
तीन जरूरी नियम 31 मार्च, 2026 तक के लिए स्थगित
कर्जदाताओं को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देने को आरबीआई ने तीन प्रस्तावित महत्वपूर्ण बैंकिंग नियमों के कार्यान्वयन को 31 मार्च, 2026 तक स्थगित करने का फैसला लिया है।