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MPC: आरबीआई अगस्त में ब्याज दरों 25 आधार अंकों की और कटौती कर सकता है, रेपो दर घटकर 5.25% पर आ जाएगी: रिपोर्ट

Fri, 18 Jul 2025 03:21 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आरबीआई - फोटो : PTI
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भारतीय रिजर्व बैंक ( आरबीआई ) की मौद्रिक नीति समिति ( एमपीसी ) आगामी अगस्त नीति बैठक में नीतिगत दर में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की एक और कटौती कर सकती है, जिससे यह 5.25 प्रतिशत पर आ जाएगी। आईसीआईसीआई बैंक की एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है।

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रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में विकास की संभावनाएं मिश्रित बनी हुई हैं। शहरी माँग कमज़ोर है, जबकि ग्रामीण माँग मजबूत बनी हुई है। अमेरिका को माल निर्यात में सुधार हो रहा है, लेकिन अन्य क्षेत्रों को निर्यात कमज़ोर बना हुआ है। इन प्रवृत्तियों और वर्तमान मुद्रास्फीति की स्थिति को देखते हुए, रिपोर्ट का मानना है कि अगस्त माह ब्याज दरों में कटौती के लिए सही समय है।

इसमें कहा गया है, "हमारा मानना है कि इससे नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की अतिरिक्त कटौती की गुंजाइश बनती है, जिससे टर्मिनल दर 5.25 प्रतिशत हो जाती है। एमपीसी नीतिगत दर में कब कटौती करेगी? हमारा मानना है कि मुद्रास्फीति की धीमी स्थिति को देखते हुए अगस्त इसके लिए उपयुक्त समय होगा।" 
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रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछली एमपीसी बैठक के बाद से मुद्रास्फीति अनुमान से काफी कम रही है। अब अनुमान है कि वित्त वर्ष 26 के लिए मुद्रास्फीति औसतन 2.9 प्रतिशत रहेगी, जो आरबीआई के पहले के 3.7 प्रतिशत के अनुमान से काफी कम है।

मुद्रास्फीति में यह गिरावट नीतिगत ढील के लिए आगे भी रास्ता खोलती है, खासकर इसलिए क्योंकि एमपीसी ने वर्तमान में तटस्थ रुख बनाए रखा है, जिसका अर्थ है कि निर्णय आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करते हैं। 

रिपोर्ट में यह भी बताया किया गया है कि आधार प्रभाव के कारण चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 27 में मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका है। इसलिए, एमपीसी के लिए वर्ष के अंत में दरों में कटौती का अवसर उपलब्ध नहीं हो सकता है। 

वैश्विक मोर्चे पर, रिपोर्ट में कहा गया है कि टैरिफ और भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण आर्थिक परिदृश्य अनिश्चित और अस्थिर बना हुआ है। पिछले महीने मध्य पूर्व में हुए एक संक्षिप्त संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई।

इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में घोषित टैरिफ, जो 1 अगस्त से लागू होने वाले हैं, मौजूदा स्तरों से ज़्यादा हैं और मुद्रास्फीति के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका में मुद्रास्फीति जून में साल-दर-साल बढ़कर 2.7 प्रतिशत हो गई, जो मई में 2.4 प्रतिशत थी।

हालांकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, फिर भी गति धीमी होने के संकेत हैं। निजी भर्तियाँ कमज़ोर हो रही हैं और खुदरा बिक्री में गिरावट आई है, जो निकट भविष्य में संभावित मुद्रास्फीतिजनित मंदी का संकेत है। 

यह स्थिति फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती करने से रोक रही है। हालाँकि, आने वाले महीनों में विकास दर में और गिरावट आने पर, फेड इस साल के अंत में ब्याज दरों में कटौती का और समर्थन कर सकता है।

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