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RBI: वर्किंग कैपिटल पर बड़ी राहत, आरबीआई ने कैश क्रेडिट खातों पर लगी पाबंदियां हटाईं; पढ़ें पूरी जानकारी

Thu, 11 Dec 2025 10:42 PM IST
हिमांशु चंदेल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

RBI Guidelines: आरबीआई ने उद्योग जगत की मांगों को ध्यान में रखते हुए कैश क्रेडिट खातों पर प्रस्तावित पाबंदियां हटा दीं। अक्तूबर में जारी मसौदे में बड़े उधारकर्ताओं के लिए लेन-देन करने वाले बैंकों की संख्या सीमित करने का प्रस्ताव था।
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क्रेडिट कार्ड। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उद्योग और कारोबार जगत को राहत देते हुए कैश क्रेडिट सुविधाओं पर लगी पाबंदियां हटा दी हैं। बैंकिंग व्यवस्था में बड़े कर्जदारों के लेन-देन पर नियंत्रण बढ़ाने के लिए अक्टूबर में जारी मसौदा दिशानिर्देशों में कई प्रतिबंध प्रस्तावित किए गए थे। लेकिन स्टेकहोल्डर फीडबैक के बाद आरबीआई ने इन्हें वापस लेने का निर्णय किया है। इससे कामकाज के लिए आवश्यक वर्किंग कैपिटल की उपलब्धता पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
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आरबीआई ने स्पष्ट किया कि कैश क्रेडिट खाते संचालन के लिहाज से करंट अकाउंट और ओवरड्राफ्ट अकाउंट से अलग होते हैं। मसौदा निर्देशों में 10 करोड़ रुपये से अधिक कर्ज वाले खाताधारकों के लिए लेन-देन करने वाले बैंकों की संख्या सीमित करने का प्रस्ताव था। लेकिन उद्योग संगठनों, बैंकों और अन्य हितधारकों ने कहा कि इससे वर्किंग कैपिटल की उपलब्धता पर असर पड़ेगा। इसी वजह से आरबीआई ने कैश क्रेडिट खातों पर प्रस्तावित पाबंदियां हटाने का निर्णय लिया।

मसौदा प्रस्तावों में क्या था?
अक्तूबर में जारी किए गए मसौदे में कहा गया था कि किसी उधारकर्ता को बैंकिंग प्रणाली में दो ही लेन-देन करने वाले बैंक चुनने की अनुमति होगी। साथ ही, यह भी प्रस्तावित था कि किसी भी बैंक को करंट अकाउंट या ओवरड्राफ्ट सुविधा तभी दी जाए जब उसका उधारकर्ता पर कम से कम 10% फंड-आधारित या कुल एक्सपोजर हो। मसौदा तैयार करने का उद्देश्य बड़े खातों के लेन-देन की निगरानी मजबूत करना था।
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फीडबैक के बाद बदलाव
आरबीआई ने बताया कि मसौदे पर प्राप्त फीडबैक में कई स्टेकहोल्डर्स ने चिंता जताई कि कैश क्रेडिट खातों पर प्रतिबंध से कारोबारियों को वर्किंग कैपिटल जुटाने में दिक्कत हो सकती है। उद्योग जगत का कहना था कि ट्रेडिंग, MSME और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कैश क्रेडिट अकाउंट वित्तीय प्रवाह बनाए रखने का मुख्य आधार हैं। ऐसे में इन पर पाबंदी संचालन को प्रभावित कर सकती है। आरबीआई ने इस पर विचार करते हुए पाबंदियां हटाने का निर्णय लिया।

अब कौन बैंक लेन-देन खाता चला सकेगा
फीडबैक को देखते हुए आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी बैंक, जिसका किसी उधारकर्ता पर 10% से अधिक एक्सपोजर है, अब करंट अकाउंट या ओवरड्राफ्ट अकाउंट चला सकता है। पहले यह सीमा दो बैंकों के भीतर रखने का प्रस्ताव था, जिसे अब हटा दिया गया है। इससे बड़े खातों को कई बैंकों के माध्यम से भुगतान और संग्रह की सुविधा बनाए रखने में आसानी होगी।

निगरानी पर सुझाव खारिज
आरबीआई ने कहा कि लेन-देन की निगरानी और नियमों के अनुपालन से जुड़े कुछ सुझाव स्वीकार नहीं किए गए। इनमें उधारकर्ताओं के सभी भुगतान की विस्तृत निगरानी और चुने जाने वाले बैंकों की संख्या में और अधिक लचीलापन का प्रस्ताव शामिल था। आरबीआई का मानना है कि निगरानी और अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ मौजूदा ढांचे आवश्यक हैं।
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वर्किंग कैपिटल को मिलेगी राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई के इस निर्णय से कारोबारियों और MSME क्षेत्र को तत्काल राहत मिलेगी। कैश क्रेडिट खाते व्यवसाय के दैनिक खर्च, खरीदारी और भुगतान के लिए अहम होते हैं। पाबंदियां हटने से कंपनियों को नकदी प्रबंधन में सुविधा मिलेगी और बैंकिंग प्रणाली में लेन-देन सुचारु रहेगा। आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए यह कदम समयानुकूल माना जा रहा है।

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