मजबूत आर्थिक वृद्धि के बीच महंगाई पर काबू पाने के प्रयासों के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लगातार आठवीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए इसे 6.5 फीसदी पर कायम रखा है। साथ ही, चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए विकास दर अनुमान 7 फीसदी से बढ़ाकर 7.2 फीसदी कर दिया है।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया, महंगाई के चलते लगातार आठवीं बार उदार रुख अपनाया गया है। हालांकि, इस बार एमपीसी के दो सदस्यों जयंत आर वर्मा व आशिमा गोयल ने रेपो दर में 0.25 फीसदी की कटौती के पक्ष में मतदान कर ब्याज दर घटाने का दबाव बढ़ा दिया है। दास समेत चार सदस्यों ने रेपो दर को यथावत रखने के पक्ष में मतदान किया।
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर आरबीआई ने कहा, बीते वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर उम्मीद से अधिक रहने और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती व दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद को देखते हुए विकास दर अनुमान बढ़ाकर 7.2 फीसदी किया गया है। 2023-24 में जीडीपी की वृद्धि दर 8.2 फीसदी रही थी। एमपीसी की अगली बैठक 6 से 8 अगस्त के बीच होगी।
खुदरा महंगाई : 4.5 फीसदी पर बरकरार
सामान्य मानसून की संभावना को देखते हुए चालू वर्ष के लिए खुदरा महंगाई के अनुमान को 4.5 फीसदी पर कायम रखा है। यह 2023-24 के 5.4 फीसदी से कम है। खुदरा महंगाई पहली तिमाही में 4.9%, दूसरी तिमाही में 3.8%, तीसरी तिमाही में 4.6% और चौथी तिमाही में 4.5% रह सकती है।
खुदरा महंगाई मार्च-अप्रैल में नरम पड़ी है, पर खाद्य मुद्रास्फीति पर दबाव से इसका लाभ नहीं मिला है। दालों व सब्जियों की महंगाई बनी हुई है। अत्यधिक तापमान व जलाशयों का जलस्तर घटने से सब्जियों व फलों की कीमत पर दबाव पड़ सकता है।
थोक जमा : मौजूदा सीमा बढ़कर अब तीन करोड़
आरबीआई ने थोक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की सीमा को दो करोड़ से बढ़ाकर तीन करोड़ रुपये कर दिया है। अब अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (ग्रामीण बैंक छोड़कर) व लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) के पास एक बार में दो करोड़ रुपये तक के जमा (रुपये में) को खुदरा एफडी माना जाएगा। स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों के लिए थोक जमा सीमा को एक करोड़ व उससे अधिक की एकल रुपया एफडी के रूप में परिभाषित करने का भी प्रस्ताव है। थोक एफडी पर खुदरा की तुलना में कुछ अधिक ब्याज है, क्योंकि बैंक नकदी प्रबंधन प्रक्रिया के तहत अलग दरें प्रदान करते हैं।
फास्टैग...अपने आप होगा रिचार्ज
यूपीआई लाइट की तरह ही फास्टैग और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) आदि सुविधाओं को भी ई-मैंडेट के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। यूपीआई लाइट वॉलेट की तरह ही फास्टैग और एनसीएमसी में पैसे यूजर्स के बैंक खाते से अपने आप जमा हो जाएगा। इन सुविधाओं में पैसा कितना रखना है, यह सीमा उपभोक्ताओं को तय करनी होगी।
यूपीआई लाइट यूजर्स को अब अपने वॉलेट में बार-बार पैसा नहीं डालना होगा। आरबीआई ने यूपीआई लाइट को ई-मैंडेट ढांचे के तहत लाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत यूजर्स को यूपीआई लाइट वॉलेट के लिए ऑटो-रिप्लेनिशमेंट सुविधा मिलेगी। इसका मतलब है कि यदि वॉलेट बैलेंस तय सीमा से कम हो जाता है, तो पैसा उनके बैंक खाते से खुद वॉलेट में ट्रांसफर हो जाएगा। इससे अतिरिक्त सत्यापन या प्री-डेबिट नोटिफिकेशन की जरूरत खत्म हो जाएगी।