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बैंकिंग ग्राहकों के लिए बड़ी राहत: RBI ने आंतरिक लोकपाल के लिए जारी किए नए नियम, शिकायत निवारण तेज होगा

Wed, 14 Jan 2026 08:00 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

RBI Directions: आरबीआई (आरबीअई) ने बैंकों और एनबीएफसी के लिए इंटरनल ओम्बड्समैन के नए नियम जारी किए हैं। इसके तहत जनरल मैनेजर रैंक के अधिकारी अब ग्राहकों की खारिज शिकायतों की समीक्षा करेंगे। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश के बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्रों में ग्राहक शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों और एनबीएफसी में इंटरनल ओम्बड्समैन यानी आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति व कामकाज के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

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इन निर्देशों का मकसद विनियमित संस्थाओं (Regulated Entities - REs) के भीतर ही शिकायतों के समाधान तंत्र को मजबूत करना और ग्राहकों की समस्याओं का त्वरित व सार्थक समाधान सुनिश्चित करना है।

किन संस्थानों पर लागू होंगे नियम? 

आरबीआई द्वारा जारी ये निर्देश विभिन्न प्रकार की वित्तीय संस्थाओं के लिए अलग-अलग जारी किए गए हैं। इस दायरे में आने वाली संस्थाएं निम्नलिखित हैं-

  • वाणिज्यिक बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक।
  • पेमेंट्स बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs)।
  • गैर-बैंक प्रीपेड भुगतान उपकरण (PPI) जारीकर्ता।
  • क्रेडिट सूचना कंपनियां (CICs)।

योग्यता और अनुभव के कड़े मानक केंद्रीय बैंक ने इंटरनल ओम्बड्समैन की नियुक्ति के लिए उच्च मानक निर्धारित किए हैं ताकि निष्पक्षता बनी रहे। नियमों के अनुसार, प्रत्येक विनियमित संस्था को कम से कम एक इंटरनल ओम्बड्समैन नियुक्त करना अनिवार्य होगा।

इस पद के लिए योग्यता की शर्तें क्या हैं?

  • पद का स्तर: आंतरिक लोकपाल या तो एक सेवानिवृत्त अधिकारी होना चाहिए या एक सेवारत अधिकारी, जिसका पद संबंधित संस्था (आरई) के 'जनरल मैनेजर' (जीएम) के समकक्ष हो।
  • अनुभव: उम्मीदवार के पास बैंकिंग, गैर-बैंक वित्त, विनियमन, पर्यवेक्षण, भुगतान और निपटान प्रणाली, क्रेडिट सूचना या उपभोक्ता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम करने का कम से कम सात वर्षों का आवश्यक कौशल और अनुभव होना चाहिए।

कैसे काम करेगी यह प्रणाली? 

इंटरनल ओम्बड्समैन की कार्यप्रणाली को लेकर आरबीआई ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। इंटरनल ओम्बड्समैन का कार्यालय जनता या ग्राहकों से सीधे तौर पर शिकायतें प्राप्त नहीं करेगा। इसका मुख्य कार्य उन शिकायतों का निपटारा करना होगा जो पहले ही विनियमित संस्था की ओर से जांची जा चुकी हैं, लेकिन वे या तो 'आंशिक रूप से हल' हुई हैं या संस्था की ओर से 'पूरी तरह खारिज' कर दी गई हैं। इस प्रकार, यह संस्था के भीतर एक शीर्ष-स्तरीय समीक्षा प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगा।

पूरी प्रक्रिया पर किसकी निगरानी होगी?

रिजर्व बैंक ने इस पूरी प्रक्रिया को अपनी निगरानी में रखा है। आरबीआई ने साफ किया है कि ग्राहक सेवा, शिकायत निवारण और इन दिशा-निर्देशों के कार्यान्वयन से संबंधित सभी पहलुओं की समीक्षा 'भारतीय रिजर्व बैंक के पर्यवेक्षण विभाग' की ओर से की जाएगी। यह विभाग नियमित पर्यवेक्षी समीक्षा के माध्यम से सुनिश्चित करेगा कि संस्थाएं इन नियमों का अक्षरशः पालन कर रही हैं।

आरबीआई का यह कदम वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में ग्राहकों के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। संस्था के भीतर ही एक अनुभवी और उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा शिकायतों की समीक्षा होने से न केवल समाधान की गति बढ़ेगी, बल्कि ग्राहकों को अपनी शिकायतों के लिए बार-बार बाहरी मंचों पर जाने की आवश्यकता भी कम होगी।

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