रिपोर्ट के लेखकों ने आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य और पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से भी बातचीत और उसके निष्कर्षों में कहा गया कि केंद्रीय बैंक के पास अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अधिशेष पूंजी नहीं है, बल्कि इसमें मामूली कमी ही दिखाई देती है।
बताई थी 3.6 लाख करोड़ की अतिरिक्त पूंजी
पिछले साल जारी एक शोध पत्र में दावा किया गया था कि आरबीआई के पास उसकी जरूरत से 3.6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी है। इसके बाद उस पर सरकार को अतिरिक्त पूंजी का हिस्सा सौंपने के लिए दबाव बढ़ गया था। जिस पर फैसले के लिए पिछले दिनों आरबीआई के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अगुवाई में छह सदस्यीय समिति बनाई गई है।
देश के 65 वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों पर आधारित सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि 7 फरवरी को होने वाली आरबीआई की एमपीसी बैठक में रेपो रेट स्थिर रह सकता है। जबकि साल के मध्य यानी जून में होने वाली बैठक में इसमें कमी आने की संभावना है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक मार्च में सरकार को 40 हजार करोड़ रुपये का अंतरिम लाभांश दे सकता है। 23 अर्थशास्त्रियों ने माना कि अगली बैठक में नीतिगत दर स्थिर रह सकती है। बता दें कि वर्तमान में आरबीआई की रेपो रेट 6.5 फीसदी है।