रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि मौजूदा विपरीत वैश्विक कारकों के बीच अर्थव्यवस्था को निरंतर नीतिगत समर्थन जारी रखना जरूरी है। इसी माह हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में उन्होंने यह बात कही। बैठक में समिति के सदस्यों ने कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते संक्रमण पर चिंता जताई।
एमपीसी की बैठक के बाद बुधवार को तीन दिनों के विचार-विमर्श का ब्योरा जारी किया गया। आठ दिसंबर को एमपीसी के छह सदस्यों ने नीतिगत ब्याज दरों को लगातार नौवीं बार सर्वसम्मति से यथावत रखने का फैसला किया। बैठक में गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के तेजी से फैलने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। इसके कारण नए सिरे से पाबंदियों का शोर होने लगा है। ऐसे में अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बढ़ने वाली हैं।
गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक कारकों से उत्पन्न कई बाधाओं का सामना कर रही है। व्यापक आर्थिक परिदृश्य को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ रही है।
ओमिक्रॉन से निपटने के लिए जारी रहेगा सस्ता कर्ज
ओमिक्रॉन के रूप में नए खतरे से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए भी रिजर्व बैंक सस्ते कर्ज का दौर जारी रखेगा। आरबीआई ने बुधवार को दिसंबर की शुरुआत में हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक के मुख्य अंश जारी किए। इसमें खुलासा किया है कि गवर्नर दास ने आगे भी नीतिगत सहयोग जारी रखने का सुझाव दिया है।
मिनट्स के अनुसार, एमपीसी बैठक में गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ओमिक्रॉन के रूप में नया वैरिएंट आने के बाद वैश्विक सूक्ष्म आर्थिक परिदृश्य पर अनिश्चितता बढ़ने लगी है। आगे जिन क्षेत्रों पर ज्यादा दबाव पड़ने वाला है, उन्हें आर्थिक सहयोग के लिए नीतिगत सुधारों को जारी रखना जरूरी है।
वैसे तो भारतीय अर्थव्यवस्था अब तेज सुधार की ओर है, लेकिन निजी खपत जैसे प्रमुख क्षेत्र अब भी कोविड पूर्व स्तर से काफी पीछे हैं। लिहाजा सुस्त पड़े क्षेत्रों को नए जोखिम से बचाने और पूर्ण रूप से सुधार होने तक नीतिगत सहारे की जरूरत होगी। अनुमान है कि केंद्रीय बैंक आगे भी रेपो रेट की कम ब्याज दर को बनाए रखेगा। एजेंसी
अर्थव्यवस्था पर फिर छाया अंधेरा
एमपीसी सदस्य व आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा ने कहा, कोविड-19 के नए वैरिएंट से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अचानक अंधेरा छाने लगा है। संक्रमण रोकने के लिए सभी देश यात्राओं पर प्रतिबंध व क्वारंटीन, सामाजिक दूरी के नए मानक बना रहे हैं। इससे सुधारों पर असर पड़ेगा।
छह में पांच सदस्यों ने नीतियां नरम रखने का पक्ष लिया
एमपीसी बैठक में गवर्नर दास व डिप्टी गवर्नर पात्रा के अलावा शशांक भिड़े, आशिमा गोयल, मृदुल के सागर ने भी नीतिगत दरें अपरिवर्तित रखने का सुझाव दिया था। इनका मानना था कि खुदरा महंगाई दायरे में रहने तक कर्ज सस्ता रखा जा सकता है। सिर्फ जयंत आर वर्मा ने दरें बढ़ाने का पक्ष लिया था।