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RBI: भारतीय वित्तीय प्रणाली को खतरों से बचाने के लिए आरबीआई ने बनाई विशेषज्ञ समिति, जानिए पूरा मामला

Mon, 25 May 2026 08:35 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय रिजर्व बैंक ने क्वांटम प्रौद्योगिकी के जोखिमों और अवसरों का आकलन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति वित्तीय क्षेत्र को भविष्य के साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए कार्ययोजना तैयार करेगी।
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भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय क्षेत्र को क्वांटम प्रौद्योगिकी के संभावित खतरों से सुरक्षित रखने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति क्वांटम प्रौद्योगिकी से उत्पन्न होने वाले अवसरों और जोखिमों की गहन जांच करेगी। इसका मुख्य लक्ष्य भारत के वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य के क्वांटम-संबंधित साइबर हमलों से बचाना है।

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यह समिति 'क्वांटम सुरक्षित और अनुकूली वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र (क्यू-सेफ)' नामक पहल के तहत बनाई गई है। क्वांटम प्रौद्योगिकी पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में एक बड़ा बदलाव लाती है। यह क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों का उपयोग करती है। इससे पोर्टफोलियो अनुकूलन और जोखिम मूल्यांकन जैसी जटिल वित्तीय समस्याओं का समाधान संभव है। हालांकि, यह मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक मानकों को कमजोर करने का महत्वपूर्ण जोखिम भी पैदा करती है। 

समिति बैंकिंग और वित्त में क्वांटम प्रौद्योगिकियों के उपयोग से जुड़े अवसरों और चुनौतियों दोनों का अध्ययन करेगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई के विद्युत इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अनिल प्रभाकर इस समिति के संयोजक होंगे। समिति में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, डेटा सुरक्षा परिषद और क्वांटम प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं।

समिति के प्रमुख कार्य

समिति वित्तीय क्षेत्र की वर्तमान क्रिप्टोग्राफिक प्रणालियों का मूल्यांकन करेगी। यह 'क्रिप्टोग्राफी बिल ऑफ मैटेरियल्स (सी-बॉम)' के माध्यम से कमजोर प्रणालियों की पहचान करेगी। समिति क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी अपनाने के लिए वित्तीय उद्योग की तैयारी का भी आकलन करेगी। इसमें विक्रेता उपकरणों और सुरक्षा समाधानों की उपलब्धता व परिपक्वता शामिल है।

कार्ययोजना और रिपोर्ट

यह समिति वैश्विक विकास का अध्ययन करने के लिए अंतर-देशीय विश्लेषण करेगी। यह मौजूदा नियामक ढांचों की पर्याप्तता का भी आकलन करेगी। समिति भारतीय वित्तीय प्रणाली को क्वांटम-सुरक्षित बनाने के लिए एक कार्ययोजना और ढांचे की सिफारिश करेगी। केंद्रीय बैंक ने बताया कि समिति अपनी पहली बैठक की तारीख से छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

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