फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अगस्त के बाद बढ़ सकते हैं बैंकों के एनपीए, आरबीआई की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में खुलासा

Sun, 26 Jul 2020 02:03 PM IST
Tanuja Yadav बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश में कोरोना महामारी के मौजूदा दौर के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम को एक बड़े खतरे के प्रति किया आगाह 
बैंकों के एनपीए पर बड़ा संकट आ सकता है 12% का उछाल 
 
विज्ञापन
RBI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना और लॉकडाउन की वजह से देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। उन कंपनियों और स्टार्टअप्स का बहुत बुरा हाल है जिन्होंने बैंकों से काफी ज्यादा कर्ज लिया हुआ था। इसके अलावा हालात ऐसे हो गए हैं कि अब कर्जदारों के पास ईएमआई तक चुकाने के पैसे नहीं बचे हैं।

विज्ञापन



रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में चेताया गया है कि बैंकिंग सिस्टम के सामने एक बड़ा खतरा आ सकता है। आरबीआई की ओर से जारी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट की माने तो बैंको का एनपीए यानि कि गैर-निष्पादित परिसंपत्ति चालू वित्त वर्ष के अंत तक बढ़कर 12.5 फीसदी हो सकता है।

बैंकों का एनपीए मार्च 2020 में साढ़े आठ फीसदी था। इससे यह साफ होता है कि कोरोना वायरस की वजह से देशभर में लगाए गए लॉकडाउन से बिजनेस काफी प्रभावित हुए हैं और बैंकों की हालत इतनी खराब हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक बहुत गंभीर दबाव वाली स्थितियों की राशि एक मार्च 2021 तक 14.7 फीसदी तक जा सकता है।
विज्ञापन


रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेस टेस्ट ये यह पता चलता है कि सभी कमर्शियल बैंकों का ग्रॉस एनपीए अनुपात मार्च 2020 के साढ़े आठ फीसदी से बढञकर मार्च 2021 में 12.5 फीसदी तक हो सकता है। इस आकलन बेसलाइन स्थिति के आधार पर किया गया है।

आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक एनपीए और जोखिम भाराशं संपत्ति अनुपात के रूप में पूंजी का आकलन किया गया है। इसमें तुलनात्मक आधार पर तीन परिस्थितियों यानि कि मध्यम, गंभीर और बहुत गंभीर के तहत परिदृश्य की गणना की गई है रिपोर्ट के अनुसार, तुलनात्मक परिदृश्य का आकलन जीडीपी के अनुपात के रूप में शक्ल राजकोषीय घाटा और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति समेत अन्य वृहत आर्थिक चरों के अनुमानित मूल्य के आधार पर किया है।

रिपोर्ट के आधार पर अगर माइक्रोइकोनॉमिक अनुपात और बिगड़ते हैं तो यह अनुपात 14.7 फीसदी तक जा सकता है। इसमें कहा गया है कि माइक्रोनोमिक दबाव के दौर में देश के बैंकों की मजबूती का परीक्षण किया गया। इसमें इस बात का आकलन किया गया कि जो भी दबाव होंगे, उसका बैंकों के बहीखातों पर क्या असर होगा।

अगर बैंकों की लोन बुक की स्थिति और खराब होती है तो इससे कैपिटल वफर प्रभावित होगा और फिर बैंकों का कंपनियों को कर्ज देना मुश्किल हो जाएगा। लोग रिपेमेंट में मोहलत यानी लोन मारेटोरियम से कंपनियों को कुछ राहत मिली है लेकिन अगस्त में इस मोहलत के खत्म होने के बाद कई बैंकों के लोन एनपीए में बदल सकते हैं।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें