आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, यूपी के अलावा जिन अन्य राज्यों ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) में तेजी दिखाई है, उनमें प्रमुख रूप से राजस्थान में वित्त वर्ष 2023-24 में 68.46 लाख कार्डधारकों ने 1.09 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया। गुजरात में कार्डधारकों की संख्या 30.18 लाख से बढ़कर 31.37 लाख और रकम 62,373 करोड़ से बढ़कर 71,138 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई।
किसान क्रेडिट कार्ड के मामले में उत्तर प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में आगे बना हुआ है। वित्त वर्ष 2023-24 तक राज्य में कुल एक करोड़ 9 लाख 17 हजार किसान क्रेडिट कार्डधारक थे। इन्होंने 1.39 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया। 2022-23 में एक करोड़ 7 लाख पांच हजार कार्डधारक थे और कर्ज की रकम 1.28 लाख करोड़ थी।
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आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, यूपी के अलावा जिन अन्य राज्यों ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) में तेजी दिखाई है, उनमें प्रमुख रूप से राजस्थान में वित्त वर्ष 2023-24 में 68.46 लाख कार्डधारकों ने 1.09 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया। 2022-23 में 65.40 लाख कार्डधारकों ने 99,543 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। गुजरात में कार्डधारकों की संख्या 30.18 लाख से बढ़कर 31.37 लाख और रकम 62,373 करोड़ से बढ़कर 71,138 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराष्ट्र में वित्त वर्ष 2022-23 में 71.75 लाख कार्डधारक थे, जिन पर 70,329 करोड़ रुपये बकाया था। 2023-24 में कार्डधारकों की संख्या बढ़कर 72.18 लाख और कर्ज की रकम 78,018 करोड़ रुपये पहुंच गई। इस अवधि के दौरान मध्यप्रदेश में किसान क्रेडिट कार्डधारकों की संख्या 62.67 लाख से बढ़कर 65 लाख पहुंच गई। इसके जरिये कुल उधारी की रकम 78,012 करोड़ से बढ़कर 84,253 करोड़ पहुंच गई।
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दक्षिण भारत सबसे आगे, कर्ज 2.78 लाख करोड़
दक्षिण भारत के लोग किसान क्रेडिट कार्ड लेने में सबसे आगे रहे हैं। इन राज्यों में वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 2.14 करोड़ किसान क्रेडिट कार्डधारक थे। इन्होंने कुल 2.78 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। उसके पहले के साल में 1.98 करोड़ कार्डधारक थे, जिन्हें कुल 2.45 लाख करोड़ रुपये का कर्ज जारी किया गया था।
पूर्वी भारत में 2023-24 में कार्डधारकों की संख्या बढ़कर 1.11 करोड़ हो गई और रकम बढ़कर 69,338 करोड़ रुपये पहुंच गई।
उत्तर भारत में 2023-24 में कार्डधारकों की संख्या 1.30 करोड़ पहुंच गई, जिन्हें 2.37 लाख करोड़ का कर्ज दिया गया।
उत्तर पूर्व भारत में 10.50 लाख कार्डधारकों पर 6,618 करोड़ रुपये बकाया था। मध्य भारत में ये आंकड़े बढ़कर क्रमशः 2.01 करोड़ और 2.40 लाख करोड़ रुपये पहुंच गए।