अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जिन्सों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चित मौसमी घटनाक्रमों के बावजूद चालू वित्त वर्ष में महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, खाने-पीने की वस्तुओं और बेवरेजेज की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई पर जोखिम बना हुआ है। 2023-24 में कुल महंगाई बढ़ाने में खाद्य वस्तुओं और बेवरेजेज की हिस्सेदारी बढ़कर 60.3 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई, जो एक साल पहले 46 फीसदी थी।
2023-24 के खरीफ और रबी दोनों मौसम में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ने सभी फसलों के लिए उत्पादन लागत पर न्यूनतम 50 फीसदी लाभ सुनिश्चित किया। खरीफ फसलों के लिए एमएसपी में 5.3-10.4 फीसदी की वृद्धि की गई, जबकि रबी फसलों का एमएसपी 2.0-7.1 फीसदी बढ़ाया गया।
गोल्ड बॉन्ड : निवेशकों ने की 27,000 करोड़ खरीद
निवेशकों ने 2023-24 में 27,031 करोड़ रुपये के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदे। यह रकम 2022-23 में खरीदे गए 6,551 करोड़ रुपये की तुलना में चार गुना ज्यादा है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में कुल 44.34 टन गोल्ड बॉन्ड खरीदे गए। इन्हें चार चरणों में जारी किया गया था।
जीडीपी को मिलेगी और गति
आरबीआई को पहली बार खाता-बही के प्रतिशत के रूप में उपलब्ध वास्तविक इक्विटी को 6.5 फीसदी के ऊपरी बैंड पर बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा है। यह झटके और ऊंची ब्याज दरों के बावजूद अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और विकास की गति को बनाए रखने में आरबीआई के विश्वास को दर्शाता है। आरबीआई से केंद्र को मिले रिकॉर्ड लाभांश का इस्तेमाल ऐसी योजनाएं शुरू करने में किया जा सकता है, जो जीडीपी को और गति दे सकती हैं। -संदीप वेंपाती, अर्थशास्त्री, भाजपा