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वीआरआरआर ऑक्शन: आरबीआई ने 2.40 लाख करोड़ की सरप्लस लिक्विडिटी नीलामी के जरिए अवशोषित की, जानिए क्या है अपडेट

Thu, 17 Sep 2026 01:59 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आरबीआई ने 17 सितंबर 2026 को VRRR नीलामी के जरिये 2.40 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस लिक्विडिटी अवशोषित कर ली है। बैंकिंग प्रणाली में 7.38 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया, जिसमें ओएमओ की बिक्री भी शामिल है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को बैंकिंग क्षेत्र से 2.40 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस लिक्विडिटी (अधिशेष तरलता) को अवशोषित किया। यह कदम वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी के माध्यम से उठाया गया। बैंकिंग प्रणाली में भारी मात्रा में अतिरिक्त धन जमा होने के कारण केंद्रीय बैंक ने यह कार्रवाई की है। आरबीआई ने 2,39,959 करोड़ रुपये की बोलियां पूरी तरह स्वीकार कीं।

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यह नीलामी 5.24 फीसदी की कट-ऑफ और भारित औसत दर पर संपन्न हुई। आरबीआई पिछले महीने से लगातार वीआरआरआर नीलामियां आयोजित कर रहा है। इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को सोखना है। साथ ही, ओवरनाइट मनी बाजार दरों को रेपो दर के अनुरूप लाना भी इसका लक्ष्य है। 16 सितंबर तक बैंकिंग प्रणाली में तरलता का अनुमानित अधिशेष करीब 7.38 लाख करोड़ रुपये था।

वीआरआरआर के अलावा, केंद्रीय बैंक ने पिछले सप्ताह एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) बिक्री की घोषणा की थी। यह बिक्री तीन किस्तों में की जाएगी। पहली किस्त 50,000 करोड़ रुपये की 17 सितंबर को हुई। शेष 25,000 करोड़ रुपये की दो किस्तें 21 और 28 सितंबर को होंगी।

बैंकिंग प्रणाली में तरलता क्यों बढ़ी?

बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ने के कई कारण हैं। बैंकों द्वारा एफसीएनआर (बी) जमाओं का भारी संग्रह एक प्रमुख वजह है। इन जमाओं से प्रणाली में विदेशी मुद्रा आई। इसके बाद आरबीआई के साथ हुए स्वैप समझौतों ने बैंकों को रुपये की तरलता प्रदान की। इसके अतिरिक्त, महीने के अंत में होने वाला सरकारी खर्च भी तरलता में वृद्धि करता है। इसमें वेतन और पेंशन भुगतान जैसे मद शामिल हैं।

आरबीआई तरलता को कैसे नियंत्रित करता है?

आरबीआई तरलता को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपकरण उपयोग करता है। वीआरआरआर नीलामी इनमें से एक महत्वपूर्ण साधन है। इन नीलामियों के जरिये केंद्रीय बैंक बैंकों से अतिरिक्त धन उधार लेता है। इससे बाजार में उपलब्ध नकदी की मात्रा कम हो जाती है। ओएमओ के तहत सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री भी एक अन्य तरीका है। इन प्रतिभूतियों को बेचकर आरबीआई बाजार से रुपये सोखता है।

इन कदमों का क्या असर पड़ेगा?

आरबीआई के इन कदमों से बैंकिंग प्रणाली में तरलता का स्तर संतुलित होगा। यह ओवरनाइट मनी बाजार दरों को रेपो दर के करीब लाने में मदद करेगा। अत्यधिक तरलता मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा सकती है। इसलिए, इसे नियंत्रित करना अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इन उपायों से वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

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