वित्त वर्ष 2016-17 तक रेल बजट और आम बजट को अलग-अलग पेश किया जाता था। तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली बार वित्तीय वर्ष 2017-18 में रेल बजट और आम बजट को एक साथ पेश कर 92 साल से चली आ रही प्रथा को समाप्त किया। पहले संसद में दो बजट पेश किए जाते थे- एक 'रेल बजट' और दूसरा 'आम बजट'। भारत सरकार ने 21 सितंबर 2016 को आम बजट के साथ रेल बजट के विलय को मंजूरी दी थी। जेटली 1 फरवरी, 2017 को आजाद भारत का पहला संयुक्त बजट संसद में पेश किया गया।
अब आते हैं इस पर कि इस बार के बजट में रेलवे को लेकर क्या बड़े एलान किए गए? पिछले दिनों रेलवे को कई बड़ी रेल दुर्घटनाओं का समना करना पड़ा। पिछले साल जून में ओडिशा में हुआ रेल हादसा, पिछले महीने बंगाल और बिहार सीमा पर हुआ रेल हादसा और हाल ही में उत्तर प्रदेश के गोंडा के पास हुर्द रेल दुर्घटना से रेलवे का फोकस इन्हें कम करने और ढांचागत मतबूती पर है। इसके अलावा वंदे भारत, अमृत भारत और बुलेट ट्रेनों पर भी सरकार काम कर रही है। यात्रियों को वेटिंग टिकट से निजात दिलाने और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखकर भी इस बजट में कई बड़े एलान किए गए। आइए जानते हैं…
नई रेल लाइन बिछाने के लिए बजट की राशि बढ़ाई
केंद्रीय बजट 2024-25 में नई रेल लाइनों को बिछाने के लिए अनुमानित 34,603 करोड़ रुपये की राशि के आवंटन की योजना है। पिछले आम बजट में यह राशि 34,410 करोड़ रुपये थी। वहीं, दोहरी रेल लाइन बिछाने के लिए भी बजट की राशि को कम किया गया है। 2024-25 के बजट में इसके लिए अनुमानित 29,312 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके लिए 2023-24 के बजट में 35,046 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
विद्युतीकरण परियोजनाओं के लिए 6,72 करोड़ रुपये
इस बजट में रेलवे की विद्युतीकरण परियोजनाओं के लिए अनुमानित 6472 करोड़ रुपये आवंटित करने की योजना बनाई गई है। यह राशि 2023-24 के केंद्रीय बजट 8361 करोड़ रुपये थे। वहीं, रेलवे के यात्रियों की सुविधाओं के लिए 2024-25 के 15,511 करोड़ रुपये आवंटित करने की योजना है। पिछले बजट में यह राशि 9,618 करोड़ रुपये थी।
सिग्नल-दूरसंचार संबंधी कार्यों और रेलपथ नवीकरण के लिए कितना बजट
सिग्नल और दूरसंचार संबंधी कार्यों के लिए भी बजट की राशि को बढ़ाया गया है। इसके लिए इस बजट में 4647 करोड़ रुपये आवंटित करने की योजना है। 2023-24 के आम बजट में यह राशि 3,581 करोड़ रुपये थी। इसी तरह, रेलपथ नवीकरण के लिए भी बजट की राशि को बढ़ाया गया है। इस बजट में इसके लिए 17,652 करोड़ रुपये की राशि आवंटित करने की योजना है। पिछले केंद्रीय बजट में यह राशि 16,826 करोड़ रुपये थी।
बजट पर रेल मंत्री वैष्णव ने क्या कहा
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्रीय बजट में रेल मंत्रालय को एतिहासिक राशि का आवंटन हुआ है। रेलवे को बजट में 2.62 लाख करोड़ रुपये मिले हैं। इस आवंटन का सबसे बड़ा हिस्सा 1.8 लाख हजार करोड़ रुपये सुरक्षा पर खर्च किया जाएगा। इसमें पुराने ट्रैक की जगह नए ट्रैक लगाना, सिग्नल सिस्टम को नई तकनीक के साथ विकसित करना और फ्लाईओवर-अंडरपास का निर्माण करना और ट्रेनों में कवच प्रणाली स्थापित करने में ये राशि खर्च की जाएगी।
रेल मंत्री वैष्णव ने कहा कि पिछले दस वर्षों में मोदी सरकार ने जो काम किए हैं, उन प्रोजेक्ट्स को हम तीसरे कार्यकाल में दोगुनी गति से इसे आगे बढ़ाएंगे। आने वाले दिनों में हम रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेंगे, रेलवे इंजन और डिब्बों के मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ाएंगे। आमतौर पर निम्न वर्ग और मध्यवर्गीय लोगों सफर के लिए रेलवे का ज्यादा का उपयोग करते हैं। पहले के मुकाबले इन दिनों जनरल कोच में यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में 700 करोड़ लोगों ने रेलवे से यात्री की है। इनमें एक व्यक्ति ने एक से अधिक बार यात्राएं की हैं। इसमें वो आंकड़ा भी शामिल किया गया है।
अंतरिम बजट में जीबीएस मद में 2.52 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए
2024-25 के अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेलवे को सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) के रूप में 2,52,200 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इसके साथ ही अतिरिक्त बजटीय संसाधनों (ईबीआर) से अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि जीबीएस कम से कम इसी स्तर पर रहने का अनुमान है। वहीं कुल बजट संभावित रूप से 2.6 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में पूंजीगत व्यय वित्तपोषण में जीबीएस की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है, जबकि ईबीआर में गिरावट आई है। EBR में भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC), संस्थागत वित्तपोषण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे स्रोतों से उधार शामिल हैं। ईबीआर के लिए आवंटन सरकार को यदि आवश्यक हो तो निवेश में देरी करने की अनुमति देता है, लेकिन बजटीय समर्थन में वृद्धि तत्काल खर्च और पूंजीगत व्यय के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत देती है।
सरकार की प्राथमिकता सूची में सुरक्षा के अलावा कोच, सिग्नलिंग और हाई स्पीड ट्रेनें
इस बीच उद्योग के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि सड़क और राजमार्ग निर्माण खर्च अपने चक्र के अंत के करीब है। इसके लिए अंतरिम बजट में 2.78 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। ऐसे में इस बार के बजट में निवेश का महत्वपूर्ण फोकस रेलवे पर रह सकता है। सरकार रेलवे के बुनियादी ढांचे के सभी क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश के साथ जीडीपी के सापेक्ष रसद लागत को कम करने के लिए रेलवे का खर्च मजबूती से जारी रखने के लिए तैयार है। सरकार की प्राथमिकता सूची में वैगन और कोच, सिग्नलिंग, नई लाइनें, गेज रूपांतरण और हाई-स्पीड ट्रेनें शामिल हैं।
कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का दायरा बढ़ाने में तेजी लाने की तैयारी
इस साल रेलवे आवंटन में वृद्धि हुई है, जिसमें सरकार सुरक्षा और यात्री आराम को प्राथमिकता दे रही है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में हाल ही में हुई ट्रेन दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सरकार कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की स्थापना में भी तेजी जाने की तैयारी कर रही है। एक मीडिया रिपोर्ट में रेलवे के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि सरकार की ओर से बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना जारी रहेगा और रेलवे अगले दशक तक एक महत्वपूर्ण निवेश क्षेत्र बना रहेगा। निजी खपत की ओर पूरे साल के बजट में संसाधन बदलाव के बारे में प्रारंभिक चिंताएं कम हो गई हैं। इससे सड़क और रेलवे जैसे क्षेत्रों में भारी पूंजीगत व्यय परिव्यय के लिए पर्याप्त जगह मिल गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सरकार को 2.11 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड तोड़ लाभांश देने जा रहा है, ऐसे में सरकार की ओर से खपत बढ़ाने और उच्च पूंजीगत व्यय योजनाओं को बनाए रखने के बीच खर्च को संतुलित करने की गुंजाइश है।