पीपीपी मोड के तहत रेलवे पर खर्च बढ़ाने की तैयारी
देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्तीय वर्ष में चार साल के निचले स्तर पर पहुंचकर 6.4% रहने का अनुमान है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 8.2% था। केंद्र सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में पूंजीगत व्यय के लिए 11.1 लाख रुपये मुहैया कराए हैं। यह राशि पिछले वित्त वर्ष (2023-24) की पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित राशि 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इस राशि का बड़ा हिस्सा रेलवे और सड़क जैसी बड़ी परियोजनाओं पर खर्च किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026 में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) के तहत निवेश लक्ष्य बढ़ाने की उम्मीद है। रेलवे ने चालू वित्तीय वर्ष में पीपीपी के तहत पूंजीगत खर्चों पर 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा है, इसका 90% मध्य जनवरी तक खर्च किया जा चुका है।
बुनियादी ढांचे के विकास और यात्री सुविधाओं पर रहेगा सरकार का जोर
चालू वित्त वर्ष में रोलिंग स्टॉक के लिए 50,903 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की योजना थी। नई लाइनें, गेज परिवर्तन, ट्रैक दोहरीकरण, यातायात सुविधाएं, रेलवे विद्युतीकरण, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में निवेश और महानगरीय परिवहन सहित क्षमता वृद्धि कार्य के लिए आवंटन 1.2 लाख करोड़ रुपये था। इस वर्ष सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए 34,412 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। वित्तीय वर्ष 2025 में रेलवे ने बुलेट ट्रेन परियोजना को क्रियान्वित करने वाली इकाई नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआरसीएल) पर 21,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई थी। इस बार के बजट में इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के काम में तेजी लाने और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। रेलवे नए वित्तीय वर्ष में आधुनिक वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का परिचालन भी शुरू करने वाला है। इससे जुड़े एलान भी बजट में हो सकते हैं। इससे लंबी यात्राओं के दौरान यात्रियों का अनुभव बेहतर होने की उम्मीद है।
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