वित्त वर्ष 2025 में ब्लिंकिट और इंस्टामार्ट जैसे त्वरित-वाणिज्य प्लेटफार्मों से 64,000 करोड़ रुपये का सामान ऑर्डर किया गया। यह आंकड़े पिछले वित वर्ष के 30,000 करोड़ रुपये से दोगुना से भी अधिक है। घरेलू रेटिंग एजेंसी केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2028 तक सकल ऑर्डर मूल्य (जीओवी) तीन गुना से अधिक बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
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वित्त वर्ष 2025 में 10,500 करोड़ रुपये का राजस्व
इसमें कहा गया कि प्लेटफार्मों ने वित्त वर्ष 25 में शुल्क के माध्यम से 10,500 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया। यह वित्त वर्ष 2022 के 450 करोड़ रुपये के मुकाबले बहुत बड़ी वृद्धि है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2028 तक राजस्व बढ़कर 34,500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इसके अलावा प्रति स्टोर औसत राजस्व में 25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इसमें बताया गया कि प्रमुख प्लेटफॉर्म्स द्वारा शुल्क में की गई बढ़ोतरी के चलते राजस्व में यह तेज उछाल देखने को मिला है। इसके अलावा कुल जीओवी में भी भारी इजाफा हुआ है।
प्लेटफॉर्म मुनाफे पर ध्यान दे रहें
प्लेटफॉर्म अब हाइपरग्रोथ (तेज विकास) की रणनीति से हटकर मुनाफे को दोबारा पटरी पर लाने पर ध्यान दे रहे हैं। इसके लिए वे विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन, प्राइवेट लेबल और तकनीक आधारित इन्वेंटरी ऑप्टिमाइजेशन जैसे विकल्पों का सहारा ले रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्लेटफॉर्म द्वारा हर लेनदेन पर वसूली जाने वाली फीस यानी 'टेक रेट' वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 18 फीसदी तक पहुंच गई है। यह वित्त वर्ष 2022 में 7 से 9 फीसदी थी।
उपभोक्ताओं की सुविधाओं में बदलाव से विकास की संभावना
रेटिंग्स शाखा की प्रमुख तन्वी शाह ने कहा कि तकनीक आधारित नवाचार और टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्रवेश इस क्षेत्र के विकास के अगले चरण को परिभाषित करेगा। कंपनी के सहायक निदेशक आमिर शेख ने कहा कि भारत की किराना मांग का केवल एक प्रतिशत हिस्सा ही क्यू-कॉम उद्योग में स्थानांतरित हो गया है। लेकिन उपभोक्ताओं की पसंद में सुविधा और आराम की ओर स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है। इसके कारण इस क्षेत्र में आगे तेजी से विकास होगा।
2024 में ई-कॉमर्स बाजार 23.8 प्रतिशत बढ़ा
भारत में 2024 में 270 मिलियन से अधिक ऑनलाइन खरीदार थे। जिससे यह वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा ई-रिटेल उपयोगकर्ता आधार बन गया। जबकि ई-कॉमर्स बाजार 2024 में एक साल पहले की अवधि की तुलना में 23.8 प्रतिशत बढ़ा है। भारत में 2025 की शुरुआत तक 1.12 अरब से अधिक मोबाइल कनेक्शन देखे गए और स्मार्टफोन अपनाने की दर भी तेजी से बढ़ रही है।
डार्क स्टोर क्यू-कॉम के लिए परिचलान इंजन
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती डिस्पोजेबल आय और उच्च खर्च क्षमता से भी क्यू-कॉम की वृद्धि को बढ़ावा मिलने की संभावना है। डार्क स्टोर या माइक्रो-वेयरहाउस, जो माल की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित करते हैं, क्यू-कॉम सेक्टर के लिए परिचालन इंजन हैं। इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में ऐसी सुविधाओं की संख्या 70 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 3,072 हो गई।