क्यूसीआई ने अस्पतालों, लैब्स और एमएसएमई के लिए लॉन्च किया QR-कोडेड क्वालिटी मार्क। अब एक स्कैन में पहचानें असली और फर्जी सर्टिफिकेट। जानें 'क्वालिटी सेतु' और नए एक्रेडिटेशन प्लेटफॉर्म के बारे में।
सरकार ने बुधवार को एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाली भारतीय गुणवत्ता परिषद यानी क्यूसीआई ने प्रयोगशालाओं (Labs), अस्पतालों और छोटे व मझोले उद्योगों के लिए एक विशेष 'क्यूआर-कोडेड मार्क ऑफ क्वालिटी' लॉन्च किया है।
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इस नई व्यवस्था का सीधा असर आम जनता और बाजार की पारदर्शिता पर पड़ेगा। QCI के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना है। अब तक बाजार में फर्जी या एक्सपायर हो चुके सर्टिफिकेट्स के सहारे चल रहे संस्थानों की पहचान करना मुश्किल था, लेकिन इस QR कोड व्यवस्था के लागू होने से 'फुल डिस्क्लोजर' (पूर्ण खुलासा) सुनिश्चित होगा। जैसे ही कोई नागरिक किसी संस्थान के सर्टिफिकेट पर लगे QR कोड को स्कैन करेगा, उसे तुरंत पता चल जाएगा कि उस लैब, अस्पताल या एमएसएमई यूनिट की मान्यता असली है या नहीं। यह कदम न केवल उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाएगा, बल्कि सही काम करने वाले संस्थानों की साख भी बढ़ाएगा।
पारदर्शिता के साथ-साथ जवाबदेही तय करने के लिए QCI ने 'क्वालिटी सेतु' (Quality Setu) नामक एक नया सिस्टम भी पेश किया है। यह एक सुरक्षित और टिकट-आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसे शिकायतों के समयबद्ध निवारण के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका मतलब है कि अगर किसी को सेवाओं या गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत है, तो अब उसकी सुनवाई एक तय समय सीमा के भीतर होगी और उसे फीडबैक भी दिया जाएगा।
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डिजिटल इंडिया और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की दिशा में आगे बढ़ते हुए, QCI ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की है। अब तक एक्रेडिटेशन (मान्यता) प्राप्त करने के लिए संस्थानों को कई अलग-अलग पोर्टल्स के चक्कर काटने पड़ते थे। इस परेशानी को खत्म करते हुए जल्द ही एक 'सिंगल, पेपरलेस और मॉडर्न एक्रेडिटेशन प्लेटफॉर्म' लॉन्च किया जाएगा। यह 'वन-स्टॉप' प्लेटफॉर्म मौजूदा सभी अलग-अलग पोर्टल्स की जगह लेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया कागज रहित और बेहद आसान हो जाएगी।