फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कतर के एलएनजी प्लांट को भारी नुकसान: हालात सामान्य होने में लग सकते हैं पांच वर्ष, भारत की चिंता क्यों बढ़ी?

Fri, 20 Mar 2026 11:17 AM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमलों से उसकी LNG निर्यात क्षमता 17% घट गई है और मरम्मत में तीन से पांच साल लग सकते हैं। इसका असर भारत समेत आयात-निर्भर देशों पर पड़ने की आशंका है।
विज्ञापन
पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर 18 और 19 मार्च 2026 को हुए मिसाइल हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी कतर एनर्जी ने आधिकारिक बयान में बताया कि इन हमलों से देश की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात क्षमता में करीब 17 प्रतिशत की कमी आई है।

कितने का हुआ नुकसान?

कंपनी के अनुसार, हमलों में प्रमुख उत्पादन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे सालाना लगभग 20 अरब डॉलर के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। मरम्मत कार्य में तीन से पांच साल तक का समय लग सकता है। इस स्थिति को देखते हुए कंपनी को कुछ दीर्घकालिक एलएनजी अनुबंधों पर फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ सकता है।

विज्ञापन


ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री और कतर एनर्जी के अध्यक्ष व सीईओ साद शेरिडा अल-काबी ने बताया कि हमलों में एलएनजी उत्पादन की दो अहम यूनिट ट्रेन 4 और ट्रेन 6 को नुकसान पहुंचा है। इन दोनों की संयुक्त उत्पादन क्षमता 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है, जो कतर के कुल निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत है। ट्रेन 4 में कतर एनर्जी की 66 प्रतिशत और एक्सॉनमोबिल की 34 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि ट्रेन 6 में कतर एनर्जी की 70 प्रतिशत और एक्सॉनमोबिल की 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

हालात सुधरने में लग सकते हैं पांच साल

अल-काबी ने कहा कि इन सुविधाओं को पूरी तरह ठीक करने में तीन से पांच साल लग सकते हैं और इस दौरान कुछ दीर्घकालिक एलएनजी आपूर्ति अनुबंधों पर पांच साल तक के लिए फोर्स मेज्योर लागू करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस आपूर्ति व्यवधान का असर चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम जैसे देशों पर भी पड़ेगा।

हमलों में पर्ल GTL (गैस-टू-लिक्विड्स) परियोजना भी प्रभावित हुई है, जिसे शेल संचालित करता है। यह संयंत्र प्राकृतिक गैस को उच्च गुणवत्ता वाले स्वच्छ ईंधन, बेस ऑयल, पैराफिन और वैक्स में बदलता है। इस परियोजना की दो यूनिट्स में से एक को नुकसान पहुंचा है और इसके कम से कम एक साल तक बंद रहने की आशंका है।

विज्ञापन


भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
इस घटनाक्रम ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी एलएनजी जरूरतों के लिए कतर पर काफी निर्भर है। वर्ष 2024 में भारत ने कुल 27.8 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी आयात किया, जिसमें से 11.30 मिलियन टन (करीब 47 प्रतिशत) कतर से आया, जिसकी कीमत 6.40 अरब डॉलर थी। 2025-26 के आधिकारिक आंकड़े भी पुष्टि करते हैं कि कतर भारत का सबसे बड़ा गैस आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

ऐसे में कतर से आपूर्ति में आई कमी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़े हुए हैं।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें