Banking: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों में लगभग 5.82 लाख करोड़ रुपये के खराब ऋणों को राइट ऑफ किया है। सरकार ने बताया है कि वर्ष 2020-21 के दौरान सबसे अधिक 1.33 लाख करोड़ रुपये की राशि राइट ऑफ की गई। यह आंकड़ा अगले वर्ष घटकर 1.16 लाख करोड़ रुपये और वर्ष 2022-23 में 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों में लगभग 5.82 लाख करोड़ रुपये के खराब ऋणों को राइट ऑफ किया है। मंगलवार को सरकार ने संसद को यह जानकारी दी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि 2024-25 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ओर से राइट ऑफ की गई ऋण की राशि 91,260 करोड़ रुपये थी। पिछले पिछले वित्त वर्ष में यह 1.15 लाख करोड़ रुपये हो गई।
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सरकार ने बताया कि वर्ष 2020-21 के दौरान सबसे अधिक 1.33 लाख करोड़ रुपये की राशि राइट ऑफ की गई। यह आंकड़ा अगले वर्ष घटकर 1.16 लाख करोड़ रुपये और वर्ष 2022-23 में 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। राइट-ऑफ के विपरीत, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले पांच वर्षों में लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपये की वसूली की है। यह वसूली पिछले पांच वित्तीय वर्षों में कुल बट्टे खाते में डाली गई राशि का लगभग 28 प्रतिशत है।
क्या है ऋणों को राइट ऑफ करने का मतलब?
चौधरी ने कहा कि बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशा-निर्देशों और बैंकों के बोर्ड की ओर से अनुमोदित नीति के अनुसार, चार वर्ष पूरे होने पर एनपीए को राइट ऑफ कर दिया जाता है यानी बट्टे खाते में डाल दिया जाता है। हालांकि इस राशि के वसूली के लिए पूरे प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा, "इस तरह की बट्टे खाते में डालने से उधारकर्ताओं की देनदारियों में छूट नहीं मिलती और इसलिए, इससे उधारकर्ता को कोई लाभ नहीं होता। उधारकर्ता पुनर्भुगतान के लिए उत्तरदायी बने रहते हैं और बैंक इन खातों में शुरू की गई वसूली कार्रवाई जारी रखते हैं।"
राइट ऑफ किए गए ऋणों को वसूलने क्या है प्रक्रिया?
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि बट्टे खाते में डाले गए ऋणों की वसूली एक सतत प्रक्रिया है। बैंक अपने पास उपलब्ध विभिन्न वसूली तंत्रों के तहत उधारकर्ताओं के खिलाफ वसूली की कार्रवाइयों को जारी रखते हैं। इन कार्रवाइयों में सिविल न्यायालयों या ऋण वसूली न्यायाधिकरणों में मुकदमा दायर करना, व दिवाला और दिवालियापन संहिता के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण में मामले दायर करना आदि शामिल हैं।
एक अन्य सवाल के जवाब में चौधरी ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में देश भर में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत 21.68 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया गया है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में चौधरी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने एसएआरएफएईएसआई अधिनियम के तहत 2,15,709 मामलों में कुल 32,466 करोड़ रुपये की वसूली की है।