एक सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार, निजी क्षेत्र द्वारा नई संपत्तियों के अधिग्रहण पर पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2026-27 में 16.5 फीसदी घटकर 9.55 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नई संपत्तियों के अधिग्रहण पर कुल पूंजीगत व्यय 11.43 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है।
सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र में लगभग 60.13 फीसदी उद्यमों ने मुख्य रूप से आय सृजन के उद्देश्य से पूंजीगत व्यय किया। जबकि 42.12 फीसदी ने मौजूदा क्षमता के उन्नयन के लिए पूंजीगत व्यय की सूचना दी। लगभग 7.2 फीसदी उद्यमों ने विविधीकरण के उद्देश्य से पूंजीगत व्यय किया। सर्वेक्षण के परिणामों से पता चलता है कि आंतरिक संचय वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पूंजीगत व्यय वित्तपोषण का प्राथमिक स्रोत है, जो कुल निवेश का 65.35 फीसदी है।
घरेलू ऋण दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है, जिसका योगदान 23.25 फीसदी है। इसके बाद देश के भीतर जुटाई गई इक्विटी 3.78 फीसदी है। बाहरी स्रोतों की भूमिका अपेक्षाकृत कम है, जिसमें 1.04 फीसदी पूंजीगत व्यय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मार्ग से और 2.38 फीसदी विदेशी ऋण के माध्यम से वित्तपोषित होता है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र में उद्यमों की पूंजीगत व्यय योजनाओं पर जानकारी एकत्र करने के लिए नवंबर 2024 से जनवरी 2025 के दौरान पहला सर्वेक्षण किया था। इस पहल की निरंतरता में, सर्वेक्षण का वर्तमान दौर अक्तूबर-दिसंबर 2025 के दौरान आयोजित किया गया था।