देश भर के निजी अस्पतालों ने सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सीजीएचएस और ईसीएचएस की कैशलेस सुविधा को बंद करने की धमकी दी है। इससे कार्यरत व रिटायर हो चुके केंद्रीय कर्मचारियों और उनके परिवार को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
वित्त मंत्रालय पर है 1600 करोड़ रुपये का बकाया
निजी अस्पतालों के एसोसिएशन ने कहा है कि उनका करीब 1600 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसका भुगतान वित्त मंत्रालय को करना है। इस संबंध में एसोसिएशन ने जुलाई में एक पत्र मंत्रालय को लिखा था, लेकिन इस पर किसी तरह की कोई बात आगे नहीं बढ़ी है।
एक करोड़ लोगों को मिलती है सुविधा
केंद्र सरकार के एक करोड़ से अधिक कार्यरत व रिटायर हुए कर्मचारियों व परिवारीजनों को सीजीएचएस और ईसीएचएस के तहत निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलती है। अगर सुविधा को बंद किया जाता है तो फिर सभी पर इसका असर देखने को मिलेगा। इसमें 32 लाख कर्मचारी सीजीएचएस और 52 लाख ईसीएचएस के तहत देश भर के एक हजार से अधिक अस्पतालों और नर्सिंग होम में स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उठाते हैं।
आयुष्मान योजना के बाद विलंब समय बढ़ा
एसोसिएशन के अधिकारियों का कहना है केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) की लॉन्चिंग के बाद से भुगतान में ज्यादा विलंब हो रहा है।एसोसिएशन के महानिदेशक डा. गिरधर ज्ञानी ने कहा कि तीन साल से सरकार ने बिलों का भुगतान नहीं किया है। इससे अस्पतालों को दिक्कत हो रही है। अगर सरकाल जल्द ही इन बिलों को माफ नहीं करती है तो फिर हमें मजबूरी में कैशलेस सुविधा को बंद करना होगा।
पहले होता पांच दिनों में भुगतान
सीजीएचएस सुविधा को एक अक्तूबर 2014 को लॉन्च किया गया था। इसमें नियम था कि बिल की 70 फीसदी राशि का पांच दिनों में भुगतान करना होगा। हालांकि इस नियम के बावजूद भुगतान में देरी होती थी। अस्पतालों को भुगतान मिलने में महीनों से लेकर साल लग जाते थे। मैक्स अस्पताल का 150 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। वहीं फोर्टिस समूह को 58 करोड़ रुपये जुलाई में लेने थे।