पाकिस्तान में गहराया आर्थिक संकट
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भारत और पाकिस्तान संघर्ष के बीच कंगाली के कगार पर पहुंच चुके पड़ोसी देश को भारी आर्थिक क्षति पहुंचने का अनुमान है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान वायु सेना (पीएएफ) हवाई हमलों और निरंतर लड़ाकू हवाई गश्त के लिए हर दिन $25 मिलियन डॉल से अधिक खर्च कर रही है। यह यह संघर्ष चार हफ्ते तक जारी रहती है तो इस मद में पाकिस्तानी वायु सेना को करीब एक अरब डॉलर तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसके आवे रा'द और हत्फ-VII जैसी मिसाइलों के उपयोग के साथ-साथ तुर्की की बायरकटर प्रणालियों को तैनात कर ड्रोन संचालन पर अतिरिक्त 450 मिलियन डॉलर खर्च होने की आशंका है।
कहां पर कितना खर्च कर रहा पाकिस्तान?
पाकिस्तान की ओर से सीमा पर अपनी तत्परता बढ़ाने जिसमें सैन्य गतिविधियां, ईंधन की खपत, रडार सक्रियण, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एसएएम) की तैनाती, और खुफिया और सिग्नल खुफिया (एसआईजीआईएनटी) परिसंपत्तियों का इस्तेमाल शामिल है- पर प्रतिदिन 15 मिलियन डॉलर का खर्च करने का अनुमान है। चार सप्ताह की अवधि में यह खर्च लगभग 450 मिलियन डॉलर हो सकता है।
संघर्ष से पाकिस्तान पर बड़ा अप्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव भी
इसके अलावे, पाकिस्तान के लिए, संघर्ष का अप्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव भी बहुत बड़ा होगा। आर्थिक गतिविधियों में रुकावट और समग्र आर्थिक अनिश्चितता से जीडीपी को 25 अरब डॉलर तक का चूना लग सकता है। वित्तीय बाजार की अस्थिरता और मुद्रा अवमूल्यन के कारण भी पाकिस्तान को 15 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावे व्यापार और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान से लगभग 12 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
5 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान
एफडीआई प्रवाह और आईएमएफ से जुड़ा 5 अरब डॉलर का नुकसान भी पाकिस्तान को उठाना पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में किए गए दावों के अनुसार पाकिस्तान और भारत दोनों को संघर्ष जारी रहने से चार सप्ताह की अवधि में करीब $500 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।