अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ बुधवार आधी रात के बाद पूरी तरह से लागू हो गए। ट्रंप ने 2 अप्रैल को जवाबी टैरिफ का एलान किया था। उन्होंने घोषणा की थी कि अमेरिका अब अपने लगभग सभी व्यापारिक साझेदारों पर न्यूनतम 10 फीसदी टैरिफ लगाएगा। वह उन देशों पर अधिक शुल्क लगाएगा, जो उससे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलते हैं। 10 फीसदी बेसलाइन शनिवार को पहले ही लागू हो गई थी। इसके बाद दर्जनों देशों पर ट्रंप की उच्च आयात कर दरें आधी रात को लागू हो गईं। इसके तहत भारत पर अब 26 फीसदी टैरिफ प्रभावी हो गया है।
टैरिफ होता क्या है?
यह वस्तुओं के आयात पर लगाए जाने वाला सीमा शुल्क या आयात शुल्क है, जिसे आयातक की तरफ से सरकार को देना होता है। आम तौर पर कंपनियां इनका बोझ उपयोगकर्ताओं पर डालती हैं। दूसरे शब्दों में इसका असर आम लोगों की जेब पर ही पड़ता है।
जवाबी टैरिफ क्या है?
यह शुल्क व्यापारिक साझेदारों की तरफ से लगाए जा रहे शुल्क में वृद्धि या उच्च शुल्क के जवाब में लगाया जाता है। यानी एक तरह से जैसे को तैसा वाला जवाबी कदम होता है।
भारत पर कितना शुल्क?
इस्पात, एल्युमीनियम और वाहनों तथा कलपुर्जों पर पहले से ही 25% शुल्क लागू है। शेष उत्पादों पर 5 से 8 अप्रैल के बीच 10% का मूल (बेसलाइन) शुल्क लगेगा और 9 अप्रैल से बढ़कर 26% हो गया।
अमेरिका की मंशा क्या है?
इससे अमेरिका में घरेलू विनिर्माण बढ़ेगा। अमेरिका का कुछ देशों खासकर चीन के साथ भारी व्यापार असंतुलन है। 2023-24 में भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 35.31 अरब अमेरिकी डॉलर था।
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किन क्षेत्रों को छूट?
एक विश्लेषण के मुताबिक, दवा, सेमीकंडक्टर, तांबे के अलावा तेल, गैस, कोयला, एलएनजी जैसे ऊर्जा उत्पाद इसके दायरे से बाहर रखे गए हैं।
भारत के लिए यह कितनी बड़ी चुनौती?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्थिति अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर है। भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। लेकिन इसके लिए उसे व्यापार को आसान बनाना होगा, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे में निवेश करना होगा।