इलेक्ट्रिक वाहनों को छूट देने के लिए दोपहिया वाहनों पर फीबेट लगाने के नीति आयोग के प्रस्ताव को लेकर भारी उद्योग मंत्रालय और आयोग के बीच मतभेद उभर आए हैं। मंत्रालय ने दोपहिया वाहन जैसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले परिवहन माध्यम पर फीबेट लगाने के प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे कीमतें बढ़ने की आशंका है। साथ ही कहा कि इस कर को संग्रह कौन करेगा क्योंकि सभी उपकर अब जीएसटी में शामिल हो गए हैं।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, आयोग का कहना है कि फीबेट के जरिए वह पूंजी जुटाएगा और इसका इस्तेमाल ई-वाहनों को छूट देने में करेगा। हमने आयोग को समझाया कि ई-वाहनों पर 12 फीसदी जबकि आईसी इंजन (पेट्रोल-डीजल इंजन) वाले वाहनों पर 28 फीसदी जीएसटी है। इसका मतलब है कि ई-वाहनों पर पहले से ही 16 फीसदी की छूट दी जा रही है। अधिकारी ने कहा कि देश में हर साल करीब दो करोड़ दोपहिया वाहन बिकते हैं। आयोग के अनुसार यदि प्रति वाहन 500 रुपये का भी फीबेट लगाया जाता है तो करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं।
क्या है फीबेट
यह एक तरह का शुल्क और छूट प्रणाली है। इसमें ऊर्जा-दक्ष या पर्यावरण अनुकूल पर कर कम होता है और प्रदूषण फैलाने वालों पर सामान्य से अधिक कर लगाया जाता है।