विश्लेषक का कहना है कि अगर मूल्यांकन सही नहीं है तो हम कुछ अच्छे कारोबार को छोड़ने के लिए भी तैयार होते हैं। हमारा उद्देश्य सही मूल्यांकन पर बेहतर प्रबंधन की ओर से संचालित होने वाले अच्छे बिजनेस को खरीदना है।
भारत में अत्यधिक अमीर यानी हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (एचएनआई) की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस परिप्रेक्ष्य में अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (एएमसी) विशेष ऑफर्स के साथ निवेशकों के इस खास वर्ग में अपनी पैठ बनाना चाह रही हैं। पीएमएस उत्पाद अब खुदरा के साथ एचएनआई निवेशकों के लिए भी अच्छा बनता जा रहा है। संपत्तियों के प्रबंधन की वृद्धि के मामले में पिछले एक साल में सबसे तेजी से बढ़ने वाली पीएमएस कंपनी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी है, जिसने एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) में 90 फीसदी की धमाकेदार वृद्धि दर्ज की। वह भी तब, जब इनवेस्को, निप्पॉन लाइफ इंडिया और मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट जैसी नामी कंपनियों की संपत्ति में गिरावट रही थी।
विश्लेषक का कहना है कि अगर मूल्यांकन सही नहीं है तो हम कुछ अच्छे कारोबार को छोड़ने के लिए भी तैयार होते हैं। हमारा उद्देश्य सही मूल्यांकन पर बेहतर प्रबंधन की ओर से संचालित होने वाले अच्छे बिजनेस को खरीदना है।
निवेश टीम की होती है मुख्य भूमिका
तीन तरह की रणनीति पर आधारित उत्पाद
कॉन्ट्रा, पीआईपीई और फ्लेक्सीकैप रणनीति पर आधारित उत्पादों ने निवेशकों को मनमाफिक नतीजे दिए हैं।
जीडीपी के मुकाबले तेजी से बढ़ने वाले उद्योगों पर फोकस
2000 में मिला था पीएमएस का पहला लाइसेंस
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वर्ष 2000 में पीएमएस लाइसेंस पाने वाली देश की पहली एसेट मैनेजमेंट कंपनी थी। दो दशक में यह पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के क्षेत्र में रुझान स्थापित करने वाली अग्रणी कंपनी रही है, जो विभिन्न निवेश थीम के इर्दगिर्द अपने उत्पाद पेश कर रही है। इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के लंबे अनुभव और क्षमता के चलते पीएमएस यूनिट ने इसके मंच पर कई निवेश ऑफर्स पेश कर लंबे समय में पैसा बनाने में मदद की है। ऐसी कंपनियां इन-हाउस बिजनेस-मैनेजमेंट-वैल्यूएशन (बीएमवी) ढांचे पर भरोसा करती है। इसका उद्देश्य लंबे समय में विकास की क्षमता वाली लचीली कंपनियों की पहचान करना है। इस ढांचे के जरिये टीम सक्षम मैनेजमेंट वाली उन मजबूत कंपनियों की पहचान करती है, जिनमें तेजी से आगे बढ़ने की क्षमता है।