प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (सांकेतिक तस्वीर)।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) की समय-समय पर आलोचना होती रहती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इस मामले में भारत का प्रदर्शन कई बड़े देशों की तुलना में बेहतर है। 2016-17 से 2021-22 के बीच यानी 6 साल में इस योजना के तहत किसानों को किए गए दावा भुगतान में भारत का औसत 83.20 फीसदी रहा।
इस अवधि में ब्राजील में औसत दावा भुगतान 83.08%, चीन में 59%, थाइलैंड में 76.28%, तुर्किये में 55.73 फीसदी और अमेरिका में 78 फीसदी रहा। इस मामले में सिर्फ इटली ही भारत से आगे रहा, जहां औसत दावा भुगतान 98 फीसदी रहा। चीन, अमेरिका और भारत की वैश्विक फसलों के बीमा प्रीमियम में 70 फीसदी हिस्सेदारी है।
छह साल में 1.28 लाख करोड़ का भुगतान
| साल |
प्रीमियम |
दावा |
| 2016-17 |
21,678 |
16,795 |
| 2017-18 |
24,299 |
21,863 |
| 2018-19 |
29,684 |
29,370 |
| 2019-20 |
32,317 |
27,771 |
| 2020-21 |
31,693 |
20,379 |
| 2021-22 |
14,591 |
12,237 |
| कुल |
1,54,265 |
1,28,415 |
सबसे खराब स्थिति में भी 99 फीसदी भुगतान
सबसे खराब स्थितियों में 2019 में अमेरिका में औसत दावा भुगतान 94 फीसदी रहा। तुर्किये में यह 66 फीसदी व भारत में 2018 में 99 फीसदी रहा। कृषि बीमा विशेषज्ञ डॉ. कोल्ली एन. राव ने बताया कि लोगों को यही बताया जाता है कि प्रीमियम कितना भरा और कितने दावे का भुगतान हुआ। इन्हीं दो कारकों पर भरोसा करना ठीक नहीं है। इसकी दो वजह हैं। पहला, प्रीमियम सीजन की शुरुआत में किसानों के पंजीकरण के समय ही तय होता है। दूसरा, दावे का पता फसल कटाई के महीनों बाद चलता है।
2020 के बाद 8 कंपनियों ने बंद किया कारोबार
डॉ. कोल्ली बताते हैं कि बीमा से जुड़ी कई लागतें होती हैं। उन्होंने बताया, इस योजना पर नजर रखने के लिए प्रमुख जिलों में 50-100 कर्मचारी तैनात किए जाते हैं। हर ब्लॉक और तहसील में एक कार्यालय में एक कॉल सेंटर व उसकी मार्केटिंग के अपने खर्च होते हैं।
- वह बताते हैं कि 2020 में फसल बीमा मुहैया कराने वाली 18 कंपनियां थीं। इनमें से 8 निजी और सरकारी कंपनियों ने फसल बीमा कारोबार बंद कर दिया है। अगर बीमा कंपनियां अनुचित लाभ कमा रही होतीं तो ऐसा नहीं होता।