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India-EFTA: पीयूष गोयल बोले- भारत-ईएफटीए मुक्त व्यापार समझौता लागू; व्यापार, रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

Wed, 01 Oct 2025 09:16 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नई दिल्ली और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन) के बीच हुआ व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (टीईपीए) से भारत के 92.2 प्रतिशत उत्पाद श्रेणियों पर टैरिफ में कटौती की उम्मीद है। पिछले साल मार्च में हुए समझौते के प्रावधानों के अनुसार, चारों देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है।
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केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल - फोटो : ANI
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विस्तार
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चार देशों के समूह यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बुधवार से प्रभावी हो गया। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय वाणिज्य और निवेश को बढ़ावा देना है। ईएफटीए के सदस्य देश आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड है। इस समझौता पर 10 मार्च, 2024 को दस्तखत किए गए थे। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और चार यूरोपीय देशों के समूह ईएफटीए के बीच मुक्त व्यापार समझौता एक अक्तूबर से लागू हो गया है। इस समझौते से व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और लोगों तथा व्यवसायों को फायदा होगा।

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उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह सच में एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि भारत-चार यूरोपीय देशों (ईएफटीए) के बीच हुआ व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (टीईपीए) लागू हो गया है। वहीं, स्विट्जरलैंड के आर्थिक मामलों, शिक्षा और अनुसंधान विभाग के प्रमुख गाइ पारमेलीन ने कहा कि आज ईएफटीए और भारत के बीच व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते का लागू होने का दिन है।

स्विट्जरलैंड के आर्थिक मामलों की राज्य सचिव हेलेन बुडलिगर ने कहा कि चार यूरोपीय देशों (ईएफटीए) और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। इसे लागू करने का इससे बेहतर समय और कोई नहीं हो सकता था। अमेरिकी टैरिफ विवाद के बीच भारत और ईएफटीए के बीच महत्वाकांक्षी समझौता बुधवार को लागू हो गया।
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नई दिल्ली और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन) के बीच हुआ व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (टीईपीए) से भारत के 92.2 प्रतिशत उत्पाद श्रेणियों पर टैरिफ में कटौती की उम्मीद है। पिछले साल मार्च में हुए समझौते के प्रावधानों के अनुसार, चारों देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है। साथ ही प्रौद्योगिकी, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, लेदर और खाद्य उत्पादों जैसे क्षेत्रों में व्यापार को बढ़ावा देने का भी आश्वासन दिया है। बुडलिगर ने कहा कि यह एक तरह से बूस्टर का काम करेगा। भारत में निवेश करने के लिए स्विट्जरलैंड से बहुत अधिक रुचि मिल रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह कहना सही होगा कि यह हमारे लिए और भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत-ईएफटीए व्यापार समझौता वाशिंगटन की व्यापार नीति से उत्पन्न मौजूदा स्थिति से बिल्कुल भी संबंधित नहीं है, क्योंकि यह समझौता 16 साल की बातचीत का परिणाम है। यह वास्तव में एक शानदार अवसर है और इससे हम जो करने की कोशिश कर रहे हैं, उसे और अधिक महत्व मिलेगा।
 
क्या है मुक्त व्यापार समझौता
मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दो या दो से अधिक देशों के बीच एक समझौता है जहां वे अपने बीच व्यापार की जाने वाली अधिकतम वस्तुओं पर सीमा शुल्क या आयात शुल्क को खत्म या कम करने पर सहमत होते हैं। इसके अलावा एफटीए सेवा निर्यात और द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देने में आने वाली रुकावटों भी कम करते हैं और मानदंडों को आसान बनाते हैं। दुनिया भर में मौजूदा वक्त में 350 से अधिक एफटीए लागू हैं और अधिकांश देशों ने एक या एक से अधिक ऐसे समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

समझौते से भारत को बड़ा फायदा
भारत को इस समूह से 15 साल में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का वादा किया है। इसके साथ ही, ईएफटीए के सदस्य देश इन निवेश प्रवाहों के परिणामस्वरूप भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखेंगे। इस निवेश प्रतिबद्धता में साफतौर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) को शामिल नहीं किया गया है, बल्कि उत्पादक क्षमता निर्माण के लिए दीर्घकालिक पूंजी पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

वादाखिलाफी का यह होगा असर
यदि ईएफटीए समूह निवेश के वादे को पूरा नहीं करता तो भारत के पास समझौते के तहत ईएफटीए देशों के उत्पादों पर सीमा शुल्क रियायतों को अस्थायी रूप से वापस लेने का विकल्प होगा। हालांकि निवेश 15 साल में होना है। इसके तहत 10 साल में 50 अरब अमेरिकी डॉलर (समझौते के कार्यान्वयन के बाद की गणना) और अगले पांच साल में पांच अरब अमेरिकी डॉलर, व्यापार समझौते में दायित्वों को पूरा करने के लिए तीन साल की अतिरिक्त छूट भी दी गई है।

समझौते में क्या खास?
समूह ने भारत के 99.6 फीसदी निर्यात को शामिल करते हुए 92.2 फीसदी टैरिफ लाइनों या उत्पाद श्रेणियों की पेशकश की है। इसमें गैर-कृषि उत्पादों पर 100 फीसदी टैरिफ रियायतें और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों पर टैरिफ रियायतें भी शामिल हैं। दूसरी तरफ ईएफटीए को भारत की पेशकश में 82.7 फीसदी टैरिफ लाइनें शामिल हैं। यह ईएफटीए निर्यात का 95.3 फीसदी हैं। इन आयातों में से 80 फीसदी से अधिक सोना (स्विट्जरलैंड से) है, और सोने पर प्रभावी शुल्क में कोई बदलाव नहीं हुआ है यानी सोने पर कोई नई छूट नहीं है।

समझौते लागू होते ही शुल्क शून्य हो जाएगा

  • भाप और कोकिंग कोयले को छोड़कर कोयला, अधिकांश दवाइयां रंग, अधिकांश वस्त्र और परिधान, तथा लोहा एवं इस्पात उत्पादों।
  • पांच साल बाद शून्य शुल्क: स्मार्टफोन, मछली का तेल, कॉड लिवर ऑयलऔर स्मार्टफ़ोन।
  • सात साल बाद शून्य शुल्क: टूना, ट्राउट, सैल्मन, जैतून का तेल, कोको बीन, पाउडर, माल्ट उत्पाद, कॉर्न फ्लेक्स, इंस्टेंट चाय, भुनी हुई चिकोरी, अधिकांश मशीनरी, साइकिल के पुर्जे, घड़ी और घड़ियां।
  • 10 साल बाद शून्य शुल्क: जैतून, एवोकाडो, खुबानी, कॉफी, कैप्सूल, मेट, हॉप कोन, कारमेल, चॉकलेट, चिकित्सा उपकरण (अधिकांश)।
  • चीनी: 10 साल में 50 फीसदी शुल्क कटौती।

सेवाओं में भी बढ़त
भारत और ईएफटीए देशों ने सेवाओं के व्यापार पर समझौता किया है।भारत ने अपनी सेवा क्षेत्र के 105 क्षेत्रों जैसे आईटी, वित्त, हेल्थकेयर, शिक्षा, पर्यटन आदि को ईएफटीए देशों के लिए खोला है। वहीं, इसके बदले भारत को अपने सेवाप्रदाताओं के लिए इन देशों में ज्यादा अवसर मिले हैं। स्विट्जरलैंड के 128 क्षेत्रो, नॉर्वे के 114 क्षेत्र, लिकटेंस्टीन के 107 क्षेत्र और आइसलैंड के 110 क्षेत्रों में बेहतर पहुंच हासिल हुई है। इसका मतलब है कि भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को अब इन देशों में काम करने, निवेश करने और सेवाएं देने के ज्यादा आसान मौके मिलेंगे। कुल मिलाकर, भारत के लिए विदेशों में ज्यादा दरवाजे खुले हैं बनिस्बत जो उसने अपने यहां खोले हैं।

देश ने अब तक 16 एफटीए पर किए दस्तखत
भारत ने श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, यूके, मॉरीशस और 10 देशों के समूह आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ) के साथ व्यापार समझौते किए हैं। 2014 से, देश ने मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए और यूके के साथ पांच व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। कुल मिलाकर, भारत ने अब तक ऐसे 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

संवेदनशील क्षेत्र हैं संरक्षित
भारत ने समझौते के तहत फार्मा, चिकित्सा उपकरण, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, डेयरी, सोया, कोयला और संवेदनशील कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखा है।

अलग-अलग देशों से फायदा
भारत के लिए स्विट्जरलैंड से खाद्य सामग्री, मिठाइयाँ, बिस्कुट, ताजा अंगूर, मेवे और बीज, ताजी सब्जियां और कॉफी तो नॉर्वे से खाद्य सामग्री, मसाले, चावल, प्रसंस्कृत सब्जियां और फल, बिस्कुट, माल्ट एक्सट्रेक्ट, पेय पदार्थ और कॉफी का फायदा मिलेगा। आइसलैंड से भी प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, चॉकलेट और मिठाइयां, ताजी/ठंडी सब्जियां में लाभ होगा।

भारतीय उपभोक्ताओं की भी होगी चांदी
भारतीय उपभोक्ताओं को स्विस वाइन, घड़ियां और चॉकलेट सस्ती दरों पर मिलेंगी। 750 मिलीलीटर की बोतल की कीमत 5 अमेरिकी डॉलर से लेकर 15 अमेरिकी डॉलर से कम वाली वाइन पर भारत पहले साल में शुल्क 150 फीसदी से घटाकर 100 फीसदी कर देगा। शुल्क में शेष कटौती दस बराबर किश्तों में होगी। अंतिम शुल्क 10वें वर्ष के अंत में 50 फीसदी होगा। इसी तरह 15 अमेरिकी डॉलर और उससे अधिक कीमत वाली वाइन पर पहले वर्ष में शुल्क 150 फीसदी से घटाकर 75 फीसदी कर दिया जाएगा। शुल्क में शेष कटौती 10 बराबर किश्तों में होगी। 10वें वर्ष के अंत में आखिरी शुल्क 25 फीसदी होगा।

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