केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने उम्मीद जताई है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते के बाद भारत समेत 28 देशों में रहने वाले लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने एक साक्षात्कार में एफटीए से मिलने वाले लाभ पर विस्तार से जानकारी दी। जानिए गोयल ने क्या बातें कहीं?
वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट से ठीक पहले केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने आज भारत-ईयू एफटीए और इससे मिलने वाले लाभ को लेकर बयान दिया। उन्होंने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (सभी समझौतों की मां) अपने सभी 28 बच्चों के प्रति दयालु और निष्पक्ष होगी। हम अमेरिका के साथ डील को 'जल्द से जल्द' पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। समझौते से जुड़े पहलुओं पर अच्छी बातचीत चल रही है।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) को व्यापक रूप से 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है। दोनों पक्षों ने घोषणा की है कि समझौते के लिए बातचीत पूरी हो गई है और इसके इस वर्ष ही लागू होने की संभावना है।
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'भारत के 99 फीसदी निर्यात को यूरोप में मिलेगी कर मुक्त पहुंच'
गोयल ने कहा कि भारत पहले से ही यूरोपीय संघ को माल और सेवाओं के निर्यात में व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) रखता है। इस समझौते के लागू होने के पहले दिन से भारत के 99 फीसदी निर्यात को कर मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे अगले पांच वर्षों में देश का निर्यात दोगुना होने की संभावना है।
'आरामदायक स्थिति से बाहर निकलें घरेलू व्यवसाय'
2024-25 में भारत का माल निर्यात 76 अरब अमेरिकी डॉलर और सेवाओं का निर्यात 46 अरब अमेरिकी डॉलर था। उन्होंने घरेलू व्यवसायों से अपील की कि वे इस अवसर को 'पकड़ें', निवेश बढ़ाएं, उत्पादन क्षमता बढ़ाएं और बड़े घरेलू बाजार की आरामदायक स्थिति से बाहर निकलें।
'भारत-ईयू एफटीए के सबसे बड़े हितधारक उपभोक्ता'
गोयल ने कहा, यह मां न तो बहुत सख्त होगी और न ही बहुत नरम। यह मां दयालु और निष्पक्ष होगी और यह सुनिश्चित करेगी कि इसके सभी 28 बच्चे (भारत और यूरोपीय संघ के 27 देश) इस एफटीए के फलों का आनंद उठाएं। उन्होंने कहा कि ईयू के साथ एफटीए में सबसे बड़े हितधारक उपभोक्ता हैं और उनके लिए वस्तुएं सस्ती होनी चाहिए।
'पांच वर्षों में निर्यात दोगुना होने की उम्मीद'
बकौल पीयूष गोयल, भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के माध्यम से पांच वर्षों में यूरोप को भारतीय निर्यात दोगुना होने की उम्मीद है। भारत 2032 तक दो ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की राह पर अग्रसर है।