पीरामल फाउंडेशन ने आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने के मकसद से बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ करार किया है। कई सम्बद्ध पक्षों वाली इस साझेदारी के जरिए भारत के अत्यधिक दबाव वाले और आदिवासी जिलों में स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति सुधारने के लिए काम किया जाएगा। इनमें आशान्वित जिले भी शामिल होंगे और इसका उददेश्य है कि भारत सरकार द्वारा 2030 तक पूरे किए जाने वाले सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल-3 (एसडीजी 3) को हासिल करने में सहयोग प्रदान किया जाए। एसडीजी-3 में सभी के लिए स्वस्थ और बेहतर जीवन पर फोकस किया गया है।
दोनों फाउंडेशन सरकार के साथ मिल कर काम करेंगे और सभी के लिए स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहयोग प्रदान करेंगे। इसके तहत समाज के सीमांत वर्गों, विशेषकर आदिवासियों की जरूरतों को ध्यान रखते हुए स्वास्थ्य सेवाएं विकसित की जाएंगी। विभिन्न जिलों की 15 करोड़ से ज्यादा की जनसंख्या को कवर किया जाएगा। इनमें केंद्रीय, पूर्व और उत्तर पूर्व भारत के आशान्वित जिले भी शामिल होंगे।
भारत की आदिवासी जनता के स्वास्थ्य सूचकांक देश की सामान्य जनता के मुकाबले बहुत कमजोर है। भारत में एक लाख जन्म पर 130 मौतों की मातृ मृत्यु दर है, जबकि यहीं पर आदिवासी समुदाय में एक लाख जन्म पर 230 की मातृ मृत्यु दर है। इसी तरह अन्य सूचकांक जैसे शिशु मृत्यु दर, शिशु कुपोषण दर, और मलेरिया तथा टयूबरक्लोसिस की बीमारियां आदिवासियों में काफी ज्यादा देखने में आती है।