अब देश में नए पेट्रोल पंपों की स्थापना पर सीएनजी, जैव ईंधन, एलएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग आदि नई पीढ़ी के वैकल्पिक ईंधन की बिक्री के लिए कम से कम एक प्वाइंट देना जरूरी हो गया है। इसके साथ कंपनियों के लिए कम से कम पांच फीसदी पंप दूरदराज के इलाकों में और कुल 100 पंप खोलना जरूरी होगा। सरकार ने मंगलवार को पेट्रोल पंप लगाने से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव का एलान किया।
इसमें कहा गया, ‘इकाई को कम से कम 100 खुदरा आउटलेट की स्थापना करनी होगी, जिनमें से पांच फीसदी प्रस्तावित आउटलेट अधिकार मिलने के पांच साल के भीतर अधिसूचित दूरदराज के क्षेत्रों में खोलने होंगे।’ वहीं आवेदक को आवेदन में उत्पादों की आपूर्ति के स्रोत, टैंक और अन्य बुनियादी ढांचे की क्षमता, उत्पादों की ढुलाई के माध्यम और सालाना आधार पर प्रस्तावित पेट्रोल पंपों के बारे में बताना होगा।
सरकार ने इससे पहले 2002 में ईंधन बिक्री की शर्तें तय की थीं और अब एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति सिफारिशों के आधार पर समीक्षा की गई है। इस कदम से फ्रांस की टोटल एसए, सऊदी अरब की अरामको, यूके की बीपी पीएलसी और ट्रैफीगुरा की डाउनस्ट्रीम आर्म प्यूमा एनर्जी के लिए भारतीय बाजार में उतरने का रास्ता भी साफ होगा।
टोटल एसए ने 1,500 आउटलेट के माध्यम से पेट्रोल-डीजल की बिक्री के लाइसेंस के वास्ते आवेदन करने के लिए नवंबर, 2018 में अडानी समूह के साथ समझौता किया था। वहीं बीपी ने भी पेट्रोल पंपों की स्थापना के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ भागीदारी कायम की थी, लेकिन उसने अभी तक औपचारिक तौर पर आवेदन नहीं किया है। वहीं प्यूमा एनर्जी खुदरा लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुकी है, जबकि अरामको इस सेक्टर में उतरने के लिए बातचीत कर रही है। सरकार के स्वामित्व वाली आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पास फिलहाल देश में 66,408 पेट्रोल पंप हैं।