देश की राजधानी दिल्ली सहित कई शहरों में डीजल के दाम सबसे महंगे स्तर पर पहुंच गए है। इसके साथ ही पेट्रोल के दाम भी अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंच चुके हैं। तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉपोर्रेशन के अनुसार दिल्ली के साथ ही चेन्नई और कोलकाता में भी डीजल की कीमत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।
बता दें कि दिल्ली में डीजल 14 पैसे महंगा होकर 69.32 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। इसके साथ ही कोलकाता में इसकी कीमत 14 पैसे बढ़कर रिकॉर्ड तोड़ 72.16 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। वहीं चेन्नई में डीजल 15 पैसे महंगा हुआ और इसकी कीमत 73.23 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। मुंबई में भी 15 पैसे की बढ़ोत्तरी से 73.59 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। यह 1 जून के बाद का उच्चतम स्तर है। पेट्रोल के दाम दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में 11-11 पैसे बढ़कर क्रमश: 77.78 रुपये, 85.20 रुपये और 80.80 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है।
देश में महंगा, विदेश में सस्ता
वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तेल रिफाइनरी कंपनियां देश में जहां लोगों को महंगा तेल खरीदने पर मजबूर कर रही हैं, वहीं विदेशों में आधे दाम पर बेच रही है। सरकारी रिफाइनरी कंपनियों ने बताया कि वो अमेरिका, इंग्लैंड, इराक, इज़रायल, ऑस्ट्रेलिया, हांगकांग और यूएई जैसे मुल्कों को 34 रुपये में पेट्रोल और 37 रुपये में डीजल बेच रही हैं। वो भी तब, जब भारत के पास पेट्रोल उगलने वाले कुएं नहीं हैं और भारतीय 75 से 85 रुपये तक में पेट्रोल खरीद रहे हैं।
विदेश से आता है कच्चा तेल, भारत में होता है रिफाइन
भारत में विदेश से कच्चा तेल आता है। तेल उत्पादक देशों के संगठन (ओपेक) में कई ऐसे देश शामिल हैं, जिनके यहां कच्चे तेल से पेट्रोल और डीजल सहित अन्य पदार्थों को निकालने के लिए रिफाइनरियां नहीं हैं। यह देश, फिर भारत जैसे उन देशों में कच्चा तेल भेजकर रिफाइन कराकर उसे वापस अपनेयहां बेचने के लिए मंगाते हैं। तेल रिफाइनरी कंपनियां फिर केंद्र सरकार द्वारा पहले से तय किये गए रेट पर इन कंपनियों को पेट्रोल-डीजल बेचती हैं।
इस वजह से बढ़ रहे हैं ईंधन के दाम
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में एक बार फिर से तेजी देखने को मिल रही है। पिछले हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में बहुत तेजी देखने को मिली है, जिसके चलते कच्चे तेल के दामों में 5 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी आई है। तुर्की में जारी आर्थिक संकट के चलते रुपये में गिरावट है। इसकी वजह से तेल कंपनियों को कच्चे तेल को आयात करने पर ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं।