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IBC: संसद में बोलीं वित्त मंत्री- कानून के दुरुपयोग पर जुर्माना लगेगा, दिवालियेपन के आवेदन पर 14 दिन में फैसला

Mon, 30 Mar 2026 01:09 PM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने IBC में देरी की मुख्य वजह अत्यधिक मुकदमेबाजी बताई है और दुरुपयोग रोकने के लिए जुर्माने का प्रस्ताव रखा है। संशोधनों के तहत डिफॉल्ट साबित होने पर 14 दिनों के भीतर इन्सॉल्वेंसी आवेदन स्वीकार करना अनिवार्य होगा। आइए विस्तार से जानते हैं।
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आईबीसी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखते हुए स्पष्ट किया है कि प्रक्रिया में देरी की मुख्य वजह अत्यधिक मुकदमेबाजी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा कि प्रस्तावित संशोधनों के जरिए इस दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए दंडात्मक प्रावधान लाए जा रहे हैं।

इन्सॉल्वेंसी आवेदन को 14 दिनों के भीतर करना होगा स्वीकार

वित्त मंत्री ने बताया कि नए बिल के तहत, किसी कंपनी में डिफॉल्ट स्थापित होने के बाद इन्सॉल्वेंसी आवेदन को 14 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से स्वीकार करना होगा। इससे मामलों के निपटान में तेजी आएगी और लंबित मामलों का बोझ कम होगा।

आईबीसी प्रक्रिया श्रमिकों के हित में

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आईबीसी प्रक्रिया में श्रमिकों के हित सुरक्षित हैं और उनके बकाया भुगतान को प्राथमिकता दी जाती है। सरकार का कहना है कि संशोधन इस सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करेंगे।

आईबीसी में 12 संशोधन करने का प्रस्ताव

सदन में पेश प्रस्ताव के अनुसार, आईबीसी में कुल 12 संशोधन किए जा रहे हैं। इनमें ग्रुप इन्सॉल्वेंसी और क्रॉस-बॉर्डर इन्सॉल्वेंसी के लिए सक्षम प्रावधान शामिल हैं, जिससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मामलों के समाधान में भी स्पष्टता आएगी।

क्या है आईबीसी का उद्देश्य?

वित्त मंत्री ने आईबीसी को बैंकिंग सेक्टर की सेहत सुधारने का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि इससे कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग बेहतर हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि आईबीसी का उद्देश्य कर्ज वसूली का साधन बनना नहीं था, बल्कि समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। 

बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य में सुधार लाने में एक प्रमुख कारक

सीतारामन ने कहा कि आईबीसी देश के बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य में सुधार लाने में एक मुख्य और बहुत ही महत्वपूर्ण कारक रहा है, और उन्होंने आगे कहा कि बैंकों ने समाधान प्रक्रिया के माध्यम से आधे से अधिक एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों) की वसूली कर ली है।

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12 अगस्त, 2025 को सरकार ने लोकसभा में दिवालियापन और दिवालिया संहिता (आईबीसी) में संशोधन करने के लिए विधेयक पेश किया, जिसमें दिवालियापन समाधान आवेदनों की स्वीकृति में लगने वाले समय को कम करने के प्रावधानों सहित कई बदलावों का प्रस्ताव किया गया। इस विधेयक को लोकसभा की एक चयन समिति को भेजा गया था, जिसने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। आईबीसी में अब तक सात बार संशोधन किया जा चुका है।
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