बढ़ती गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) पर चिंता जताते हुए संसदीय समिति ने कहा कि एसबीआई एक्ट समेत बैंकिंग कानूनों में संशोधन की जरूरत है। ताकि बड़े बकाएदारों के नाम का खुलासा हो सके।
संसद में याचिका संबंधी संसदीय समिति ने कहा, बैंकों पर परिसंपत्तियों का दबाव कम करने और बैलेंस सीट साफ करने की जरूरत है। इससे बैंकों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और वे पूंजी भी बढ़ा सकेंगे। समिति ने सरकार और आरबीआई की ओर से उठाए गए उन कदमों की सराहना की, जिससे एनपीए पर रोक लग रही है और बैंकों में दबाव वाली परिसंपत्तियां भी घटी हैं। समिति ने उन कानूनों की तारीफ की, जिससे बैंकों की वसूली बढ़ी है।
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रिपोर्ट के मुताबिक समिति ने सरकार को सलाह दी है कि एसबीआई कानून के प्रावधानों और अन्य आवश्यक कानून में भी बदलाव किया जाए, जिससे बैंक से पैसे लेकर न लौटाने वाले बड़े कर्जधारकों के नाम का खुलासा हो सके। समिति ने कहा कि आरबीआई भी जानबूझ कर कर्ज न अदा करने वालों के नाम सार्वजनिक करने के पक्ष में है।
हालांकि वित्त मंत्रालय/आरबीआई का मत है कि उन कर्जधारकों का नाम सार्वजनिक न किया जाए, जिनके बिजनेस में फिर से चलने की संभावना बाकी है।
समिति ने यह भी कहा कि उद्योगपतियों की ओर से राशि को दूसरे बिजनेस में लगाना और लोन देने से पहले बैंक अधिकारियों की लापरवाही कर्ज न लौटने का बड़ा कारण है। बड़े कर्जधारकों को लोन देने के लिए उचित और कठोर तंत्र होना चाहिए।