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अब RBI की निगरानी में आएंगे सहकारी बैंक, विधेयक को मिली संसद की मंजूरी

Tue, 22 Sep 2020 03:19 PM IST
‌डिंपल अलवधी पीटीआई, नई दिल्ली
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI
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सहकारिता क्षेत्र के बैंकों को बैंकिंग क्षेत्र की नियामक संस्था, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निगरानी दायरे में लाने के प्रावधान वाले एक विधेयक को मंगलवार को संसद की मंजूरी मिल गई है। इस विधेयक का उद्देश्य जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है।

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राज्यसभा ने इस प्रवाधान वाले बैंकिंग नियमन (संशोधन) विधेयक, 2020, को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक को लोकसभा 16 सितंबर को पारित कर चुकी है। यह विधेयक कानून बनने के बाद उस अध्यादेश की जगह लेगा, जिसे 26 जून को लाया गया था।

ये है विधेयक का उद्देश्य
पीएमसी बैंक घोटाले की पृष्ठभूमि में लाए गए इस विधेयक का उद्देश्य सहकारी बैंकों में पेशेवर तौर तरीकों को बढ़ाना, पूंजी तक पहुंच को बेहतर बनाना, प्रशासन में सुधार लाना और रिजर्व बैंक के माध्यम से समुचित बैंकिंग व्यवस्था को सुनिश्चित करना है।
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वित्त मंत्री ने दिया बयान
राज्यसभा में विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जमाकर्ताओं के हितों की पूर्ण रक्षा करने के लिए ये प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संशोधन केवल बैंकिंग गतिविधियों में लगी सहकारी समितियों के लिए है। सीतारमण ने कहा, 'कोविड-19 की अवधि के दौरान कई सहकारी बैंक वित्तीय दबाव में आ गए। उनकी वित्तीय स्थिति पर नियामक संस्था रिजर्व बैंक द्वारा कड़ी निगरानी की जा रही है।' 

यस बैंक का समाधान निकालने में सक्षम हुई सरकार
संशोधनों की आवश्यकता को उचित ठहराते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार संकट से जूझ रहे यस बैंक का जल्द समाधान निकालने में सक्षम हुई क्योंकि यह वाणिज्यिक बैंक नियमों द्वारा संचालित था, लेकिन पीएमसी बैंक संकट का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है।

कंपनी संशोधन बिल पारित, कई कंपाउंडेबल कृत्य अपराध नहीं
राज्यसभा ने देश में कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने और क्षमा योग्य (कंपाउंडेबल) कृत्यों को अपराध के दायरे से बाहर करने वाले बिल को भी मंजूरी दी। संक्षिप्त चर्चा के बाद कंपनी (संशोधन) बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इससे पहले, 19 सितंबर को निचले सदन से बिल को मंजूरी मिल चुकी है। बिल में विभिन्न दंड वाले प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, भारतीय कॉर्पोरेट कंपनियों को विदेशों से सीधे सूचीबद्ध कराने और मूल कानून में उत्पादक संगठनों को लेकर नया अध्याय जोड़ने का प्रावधान किया गया है।

चर्चा के दौरान वित्तमंत्री ने कहा, कंपनी कानून 2013 में अभी तक कुछ मुद्दे हैं। बिल के जरिये कानून की 48 धाराओं में संशोधन का प्रावधान है ताकि विभिन्न कृत्यों को अपराध श्रेणी से बाहर किया जा सके। कंपनी कानून के तहत वर्तमान में करीब 124 दंडात्मक प्रावधान हैं, जबकि मूल कानून में 134 दंडात्मक प्रावधान थे। हालांकि वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और लोक हित को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों से सख्ती से निपटा जाएगा।
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