विशेषाधिकार हनन नोटिस मामले में एक संसदीय समिति ने बजट सत्र के पहले चरण के दौरान उच्च सदन की कार्यवाही बाधित करने के मामले में एक निलंबित सदस्य सहित राज्यसभा के 13 विपक्षी सांसदों से स्पष्टीकरण मांगने का फैसला किया है। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
राज्यसभा के सभापति उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इनमें से 12 सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस संबंधित समिति को भेजा था। उपसभापति हरिवंश की अध्यक्षता वाली राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने सोमवार को सर्वसम्मति से 13 सांसदों से स्पष्टीकरण मांगने का फैसला किया, जिनमें कांग्रेस के नौ और आप के तीन सांसद शामिल हैं।
इन सांसदों में से कांग्रेस की रजनी पाटिल को उच्च सदन की कार्यवाही की वीडियोग्राफी करने के लिए 13 फरवरी को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था। पार्टी के अन्य सदस्यों में शक्तिसिंह गोहिल, नारनभाई जे राठवा, सैयद नासिर हुसैन, कुमार केतकर, इमरान प्रतापगढ़ी, एल हनुमनथैया, फूलो देवी नेताम, जेबी माथेर हिशाम और रंजीत रंजन शामिल हैं।
आप के तीन राज्यसभा सदस्य संजय सिंह, सुशील कुमार गुप्ता और संदीप कुमार पाठक हैं। राज्यसभा में 18 फरवरी को जारी बुलेटिन में कहा गया है कि धनखड़ ने विशेषाधिकार समिति से 12 सांसदों के सदन के बीचोबीच बार-बार घुसने, नारेबाजी करने और कार्यवाही में बाधा डालने के लिए विशेषाधिकार हनन के मामले की जांच करने को कहा है।
इसी महीने समाप्त हुए बजट सत्र के पहले चरण के दौरान विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सांसदों के विरोध प्रदर्शन के कारण राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। सूत्रों ने कहा कि चूंकि सदस्य विशेषाधिकार समिति से सीधे शिकायत नहीं कर सकते, इसलिए मामला अध्यक्ष के समक्ष आया। जिन्होंने इसे जांचने, पड़ताल करने और रिपोर्ट देने के लिए पैनल के पास भेज दिया।