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GST: जीएसटी मुआवजा उपकर पर परिषद से समय सीमा बढ़ाने की मांग करेगा पैनल, 31 दिसंबर तक जमा करनी थी रिपोर्ट

Tue, 03 Dec 2024 12:27 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जीओएम ने यह फैसला किया है कि मुआवजा उपकर से जुड़े कई कानूनी मुद्दे हैं, जिन पर विस्तार से चर्चा करनी होगी, जिसमें समय लगेगा। इसलिए, उन्होंने परिषद को रिपोर्ट जमा करने के लिए समय बढ़ाने की मांग करने का फैसला लिया।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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 वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के नेतृत्व में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) क्षतिपूर्ति उपकर पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने सोमवार को रिपोर्ट सौंपने के लिए जीएसटी परिषद से छह महीने की मोहलत मांगने का फैसला किया। इस समूह में असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मंत्री शामिल हैं। इस समूह को 31 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट जीएसटी परिषद को सौंपने का आदेश दिया गया था। 

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एक अधिकारी के अनुसार, जीओएम ने यह फैसला किया है कि मुआवजा उपकर से जुड़े कई कानूनी मुद्दे हैं, जिन पर विस्तार से चर्चा करनी होगी, जिसमें समय लगेगा। इसलिए, उन्होंने परिषद को रिपोर्ट जमा करने के लिए समय बढ़ाने की मांग करने का फैसला लिया। अधिकारी के अनुसार, जीएसटी परिषद से 5-6 महीने का एक्सटेंशन मांगा जा सकता है। 

अधिकारी ने आगे कहा, 'हमारे पास उपकर पर अंतिम फैसला करने के लिए मार्च 2026 तक का समय है, इसलिए इस पर चर्चा करने के लिए अभी और समय है, और हमें इस मुद्दे पर कानूनी राय भी लेनी पड़ सकती है।'
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2022 में जीएसटी परिषद ने उपकर को मार्च 2026 तक बढ़ाने का फैसला किया
जीएसटी व्यवस्था में, विलासिता, पाप और अवगुण वस्तुओं पर 28 फीसदी के अतिरिक्त मुआवजा उपकर लगाया जाता है। इस उपकर से मिलने वाली राशि का उपयोग राज्यों को जीएसटी लागू होने के बाद होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए किया गया था। यह उपकर पहले 5 साल तक लागू किया गया था, लेकिन 2022 में जीएसटी परिषद ने इसे मार्च 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया था, ताकि कोविड के दौरान हुए राजस्व घाटे की भरपाई की जा सके। 

परिषद ने 54वीं बैठक में जीओएम गठित करने का फैसला किया
उपकर समाप्त होने में केवल डेढ़ साल शेष रहने पर, जीएसटी परिषद ने 9 सितंबर को अपनी 54वीं बैठक में उपकर के भविष्य के पाठ्यक्रम को तय करने के लिए एक जीओएम गठित करने का निर्णय लिया।

जीओएम ने पहली बैठक में 7वीं परिषद बैठक की चर्चाओं को याद किया
16 अक्तूबर को जीओएम की पिछली बैठक में, राज्यों ने 22-23 दिसंबर, 2016 को आयोजित 7वीं जीएसटी परिषद की बैठक में हुई चर्चाओं को याद किया, जिसमें तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि मुआवजा उपकर को पांच साल बाद जीएसटी में समाहित किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, राज्यों ने यह सुझाव दिया कि एक बार जब उपकर को करों में मिलाने का फैसला हो जाता है, तो विलासिता, पाप और अवगुण वस्तुओं की सूची में कोई नया सामान नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

मार्च 2026 में समाप्त होगा मुआवजा उपकर
सूत्रों के अनुसार, राज्यों का विचार था कि मुआवजा उपकर मार्च 2026 में समाप्त हो रहा है, इसलिए इसे पुनर्गठित करने का एकमात्र तरीका करों के साथ लेवी का विलय करना और जिन वस्तुओं पर उपकर लगाया जाता है, उनके लिए अलग कर दरें लाना है।
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