अमेरिका में पढ़ रहे पाकिस्तानी छात्र और अन्य वीजाधारक अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन सोशल मीडिया की गहन जांच कर रहा है ताकि किसी भी तरह की अमेरिकी विरोधी या चरमपंथी सामग्री का पता लगाया जा सके।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस जांच में अधिकारी अमेरिकी नागरिकों, संस्कृति, सरकार या संस्थानों के प्रति शत्रुता के किसी भी संकेत के लिए सोशल मीडिया गतिविधि की समीक्षा कर रहे हैं। इसमें कहा गया कि यहां तक कि मामूली उल्लंघन, राजनीतिक गतिविधि या अपूर्ण दस्तावेज भी उनके प्रवास को खतरे में डाल सकते हैं।
डॉन ने बताया कि ट्रैफिक उल्लंघन और कैंपस प्रदर्शन जैसी घटनाएं अब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) को दी जा सकती है। इससे पाकिस्तानी समुदाय में चिंता बढ़ गई है। उत्तरी वर्जीनिया में एक यातायात अदालत के जज ने हाल में दो पाकिस्तानी छात्रों को बताया कि अब अदालतों को ट्रैफिक उल्लंघन के रिकॉर्ड डीएचएस के साथ साझा करने होंगे।
बाल्टीमोर के छात्र यूनुस खान ने कहा कि हम शिकागो जाने की योजना बना रहे थे, लेकिन हमें सलाह दी गई है कि न जाएं। हम वीजा पर हैं और छोटी सी गलती भी रद्दीकरण का कारण बन सकती है। फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों में भाग लेने से पाकिस्तानी छात्रों की चिंता और बढ़ा दी है। बाल्टीमोर की छात्रा समीना अली ने कहा कि हममें से कुछ लोग उन प्रदर्शनों में शामिल हुए थे और अब हमें नहीं पता कि हम रह पाएंगे या निर्वासन का सामना करेंगे।
पाकिस्तानी दूतावास के अनुसार अमेरिका में सात लाख से 10 लाख पाकिस्तानी रहते हैं, जिनमें अधिकांश नागरिक या दीर्घकालिक निवासी हैं। हालांकि, कई लोग आधिकारिक तौर पर पंजीकृत नहीं हैं। इसलिए सटीक आंकड़े स्पष्ट नहीं है।
पाकिस्तान ने 2024 में 10,988 छात्रों को अमेरिका भेजा, जबकि बांग्लादेश से 17,099 और नेपाल से 16,742 छात्र पहुंचे। भारत 3,31,602 छात्रों के साथ सूची में शीर्ष पर रहा। 2025 में पाकिस्तानी छात्रों की संख्या बढ़कर लगभग 12,500 तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन स्थित पाकिस्तानी अधिकारी स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं और छात्रों को कानूनी दस्तावेजों की वैधता, अपने अधिकारों की जागरूकता और राजनीतिक गतिविधियों में सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।